हिंदी विवि में ‘प्रेमचंद और हाशिए का समाज’ विषय पर चर्चा

वर्धा 01 अगस्‍त। महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में हिंदी के महान कथाकार प्रेमचंद की जयंती पर ‘प्रेमचंद और हाशिए का समाज’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अध्‍यक्षता करते हुए सुविख्‍यात लेखक, आलोचक तथा हिंदी विश्‍वविद्यालय के अतिथि लेखक प्रो. वागीश शुक्‍ल ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्‍यम से हाशिए के लोगों को भाषा दी। उनके साहित्‍य के केंद्र में हमेशा हाशिए के समाज की बात प्रभावी रूप से उजागर होती रही है।
साहित्‍य विद्यापीठ द्वारा 31 जुलाई को हबीब तनवीर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्‍य वक्‍ता के रूप में साहित्‍यकार एवं कवि प्रो. गंगा प्रसाद विमल, विशिष्‍ट वक्‍ता के रूप में वर्धा के जिला पुलिस अधीक्षक अनिल पारस्‍कर तथा साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. सूरज पालीवाल मंचासीन थे।
प्रो. गंगा प्रसाद विमल ने कहा कि प्रेमचंद पर पौर्वात्‍य का प्रभाव था। उन्‍होंने अपनी आरंभिक कहानिओं में भारतीय समाज पर लिखा। वे अपनी रचनाओं में हमेशा सुधार की बातें करते थे और हाशिए के समाज को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उन्‍होंने कहा कि राजनीतिक परिवर्तन के बाद भी हाशिए के समाज की स्थिति बदली नहीं है। विशिष्‍ट वक्‍ता के रूप में उपस्थित जिला पुलिस अधीक्षक अनिल पारस्‍कर ने प्रेमचंद और वर्तमान समय का संदर्भ लेते हुए कहा कि अनेक परिवर्तनों के बाद हम आज महासत्‍ता की बात कर रहे हैं। अनेक अंतर्विरोध के बावजूद हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि देश के बाहर सम्‍मान बढ़ाने के लिए हमें युवाओं को अच्‍छे नागरिक बनाने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। देश की व्‍यवस्‍था में और सुधार लाने के लिए हमें अधिकार के साथ कर्तव्‍य भी निभाने चाहिए और अनुकूल दृष्टि रखने से इस पर अमल किया जा सकता है।
इस अवसर पर अहिंसा एवं शांति अध्‍ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर राकेश मिश्र ने भी अपनी बात रखी। स्‍वागत वक्‍तव्‍य प्रो. सूरज पालीवाल ने दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति सागर ने किया तथा धन्‍यवाद ज्ञापन डॉ. रामानुज अस्‍थाना ने प्रस्‍तुत किया। कार्यकम में डॉ. शोभा पालीवाल, डॉ. नृपेंद्र प्रसाद मोदी, डॉ. उमेश कुमार सिंह, डॉ. अशोकनाथ त्रिपाठी, डॉ. बीर पाल सिंह यादव, डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. अमरेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. श्रीरमण मिश्र, बी. एस. मिरगे सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी प्रमुखता से उपस्थित थे।