प्रो. मोहन मैत्रेय को ‘उत्तर भारत के लोकनृत्य’ पुस्तक पर मिला एक लाख का पुरस्कार
प्रो. मोहन मैत्रेय को ‘उत्तर भारत के लोकनृत्य’ पुस्तक पर मिला एक लाख का पुरस्कार
चंडीगढ़, जयश्री राठौड़।
शिक्षाविद्, साहित्यकार, पत्रकार और पूर्व सहायक निदेशक पंजाब शिक्षा विभाग (कालेज) प्रो० मोहन मैत्रेय को भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संभाग केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय ने उनकी सन् 2003 में प्रकाशित पुस्तक ‘उत्तर भारत के लोकनृत्य’ के लिए एक लाख रुपये की राशि से पुरस्कृत किया है। तीन भाषाओं हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेजी में रचना धर्मिता को अपनाने वाले मोहन मैत्रेय को प्रकाशित-प्रसारित व्यंग्य-वार्ताओं, समालोचनाओं, निबन्धों के कारण जाना पहचाना जाता है। दो सौ से अधिक ले ाों, शोधपत्रों के अतिरिक्त श्री मैत्रेय ने अनेक पाठय पुस्तकें रची है और अनेक पुस्तकें संपादित भी की हंै। भारतीय संस्कृति तथा प्राच्य विधाओं के प्रचार-प्रसार में सलंग्न मैत्रेय ने एक ओर इस सन्दर्भ में अनेक संगोष्ठियों का आयोजन किया है तो दूसरी ओर पुस्तकों के रूप में भी योगदान किया है। इनके प्रसिद्व ग्रन्थों में साहित्य दिग्दर्शन, पटियाला, सांस्कृतिक विरासत, भारतीय चेतना एवं चिन्तन तथा हिमाचल: प्रकृतिक पर्यटन शामिल हैं। मैत्रेय अपने योगदान के लिए अनेक साहित्यिक-सांसकृतिक संस्थाओं द्वारा स मानित भी हो चुकें हैं। ज्योतिष एवं संस्कृति स बन्धी लेखों के लिए आपको ब्रह्यर्षि श्री राधा रमण दास ज्योतिष पुरस्कार राशि 11,000 रुपये से सम्मानित किया गया। मैत्रेय हरियाणा ग्रन्थ अकादमी में संपादकीय सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।


