महामहिम ने नकारा महान के आदिवासियों के अधिकारों को
भोपाल। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले मध्य प्रदेश के राज्यपाल ने महान के आदिवासियों और महान संघर्ष समिति के सात सदस्यों के साथ मुलाकात की। मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने आदिवासियों की माँगों को सिरे से खारिज कर दिया।

महान संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ प्रतिनिध मंडल में शामिल ग्रीनपीस की अभियानकर्ता प्रिया पिल्लई ने बताया कि राजभवन में राज्यपाल के साथ मुलाकात के दौरान समिति के सदस्यों ने सिंगरौली के महान जंगल में हो रहे वनाधिकार अधिनियम के उल्लंघन और जीविका के लिए जंगल पर निर्भरता के बारे में बताना चाहा लेकिन राज्यपाल ने सुनने से भी इन्कार कर दिया।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद महान संघर्ष समिति के सदस्य काफी हताश हुए। आदिवासियों के साथ इस तरह के व्यवहार को देखकर राज्यपाल से मिलने आए प्रतिनिधियो में शामिल महिला आदिवासी कांति सिंह खैरवार काफी दुखी और क्षुब्ध हैं। उन्होंने कहा कि "हम लोग अपने परिवार को छोड़ चौबीस घंटे का सफर तय कर राज्यपाल से मिलने पहुँचे लेकिन राज्यपाल ने हमारी माँगों को सुनने की बजाय हमारे ज्ञापन तक को देखने से इंकार कर दिया। इन सबके बावजूद हम लोग अपनी लड़ाई को जारी रखेंगे और महान जंगल पर वनाधिकार कानून लेकर रहेंगे"।

प्रिया पिल्लई ने कहा कि राज्यपाल ने जिस तरीके से आदिवासियों के ज्ञापन उनके चेहरे पर फेंका, वो उनकी आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर संकीर्णता को दर्शाता है। इस घटना से हमारी लड़ाई और ज्यादा निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है और हमलोग महान जंगल पर अपने अधिकारों के लिए अपनी लड़ाई को तेज करेंगे।"