नई दिल्ली। और किसी मामले में हो या न हो लेकिन फर्जी मुठभेड़ों के मामले में उत्तर प्रदेश अव्वल नम्बर पर है, पिछले तीन साल में प्रदेश में कथित तौर पर पुलिस के हाथों फर्जी मुठभेड़ों में करीब 120 लोग मारे गये हैं। इस साल के शुरुआती छह माह में राज्य में कथित फर्जी मुठभेड़ों में छह व्यक्ति मारे गये और उनके परिजनों ने न्याय के लिये राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से सम्पर्क किया है।
एक समाचार एजेन्सी की खबरों में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2010-11 के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को उत्तर प्रदेश में कथित फर्जी मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों के हाथों 40 लोगों के मारे जाने की शिकायतें मिली थीं जबकि वर्ष 2008-09 और 2009-10 के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ में प्रदेश में 71 लोग मारे गये।

एजेन्सी ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि देश भर में वर्ष 2008-09 की शुरुआत से जून तक फर्जी मुठभेड़ों के 369 मामले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दर्ज किये। 90 मामलों में पुलिस की कार्रवाई सन्देहपूर्ण पायी गयी और आयोग ने मृतकों के परिजनों को 4.54 करोड़ रुपये की आर्थिक राहत देने की सिफारिश की। कुल 369 मामलों में से 98 मामले आयोग हल कर चुका है, जबकि 271 मामलों का निपटारा बाकी है।

उत्तर प्रदेश के बाद पिछले तीन साल के दौरान फर्जी मुठभेड़ों के मामले में मणिपुर का दूसरा स्थान रहा है। यहाँ 2008-09 में फर्जी मुठभेड़ के 16, वर्ष 2009-10 में 32, वर्ष 2010-11 में 12 और 2011 के शुरुआती छह माह में एक मामला दर्ज किया गया। उग्रवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन साल के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ के 14 मामले दर्ज किये गये। इनमें सर्वाधिक 11 मामले वर्ष 2010-11 में दर्ज किये गये। इस साल अब तक राज्य में ऐसे किसी मामले की खबर नहीं है।

नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में पिछले तीन साल में फर्जी मुठभेड़ के 11 मामलों की खबर है, जबकि माओवाद प्रभावित अन्य राज्यों झारखंड और उड़ीसा में ऐसे क्रमश: 13 और 12 मामले दर्ज किये गये। अपेक्षाकृत शांत समझे जाने वाले तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में पिछले तीन साल में कथित फर्जी मुठभेड़ों के 15-15 मामले दर्ज किये गये। पश्चिम बंगाल में कथित फर्जी मुठभेड़ के कुल 23 मामले बीते तीन बरस में दर्ज किये गये, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐसे छह मामले दर्ज किये गये।
अब सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी मुठभेड़ों के आरोप के बाद भी सरकारें पुलिस के समर्थन में क्यों खड़ी होती हैं? वैसे उत्तर प्रदेश की मुखिया अपनी इस उपलब्धि पर खुश हो सकती हैं।