फिर उछलने लगा पंचकूला को राजधानी बनाने का मुद्दा
फिर उछलने लगा पंचकूला को राजधानी बनाने का मुद्दा
राज्य के कानून अपनी ही राजधानी में लागू नहीं होते
कमलजीत अविनाशी
विधानसभा चुनावों के चलते प्रदेश के नेताओं ने अपनी अलग राजधानी बनाने का शगूफा फिर छोड़ दिया है। अब पंचकूला को प्रदेश की राजधानी बनाने की बात हो रही है। हालांकि भाजपा, कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे को नहीं लिया है लेकिन दोनों पार्टियों के दो सांसद इसकी वकालत कर रहे हैं।
पंचकूला को राजधानी बनाए जाने का शगूफा इसलिए फेंका गया क्योंकि अधिकांश सरकारी विभागों के मुख्यालय यहीं पर है। इसके लिए यह तर्क भी दिया जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा के कानून उनकी अपनी ही राजधानी चंडीगढ़ में लागू नहीं होते क्योंकि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है। वहां के लिए पॉलिसी, कानून और रूल्स बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के समय प्रदेश में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी कानून के समय भी यह परेशानी आई थी। तब उन्होंने पंचकूला को राजधानी बनाने की मंशा जाहिर की थी।
भाजपा सांसद रतनलाल कटारिया ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो पंचकूला को राजधानी बनाया जाएगा। साथ ही विधानसभा से लेकर हाईकोर्ट तक सब हरियाणा के अपने अलग होंगे। इससे पहले कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य बीरेंद्र सिंह ने भी एक कार्यक्रम में पंचकूला को प्रदेश की राजधानी बनाने की वकालत की थी। बीरेंद्र ने कहा था कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला तो वे पंचकूला को राजधानी बनाएंगे।
दोनों ही सांसदों की बात से उनकी पार्टियों, भाजपा और कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता वीर कुमार यादव ने बताया कि कटारिया ने यह बयान क्यों दिया, ये तो वही बता सकते हैं लेकिन पार्टी में इस तरह का कोई फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में जब पुन: सांसद कटारिया से बात की गई तो उनका कहना था कि वे इस क्षेत्र से सांसद हैं और क्षेत्र का विकास करवाना उनकी जिम्मेदारी है। सांसद होने के नाते पार्टी में इस तरह की मांग तो वे उठा ही सकते हैं। हालांकि आखिरी फैसला कैबिनेट में होना है। कटारिया ने कहा कि ये मुद्दा उन्होंने संसद में भी उठाया था। इसी तरह प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता रण सिंह मान ने कहा कि कांग्रेस उसी नेता की बात को तवज्जो देगी जो हाईकमान के फैसले के साथ है इसलिए किसी अन्य नेता का इस तरह की बातें करना अप्रासंगिक है।
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