नई दिल्ली। सोशलिस्ट पार्टी ने गाजा इलाके के नागरिकों पर पिछले एक सप्ताह से जारी इजरायल के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है जिनमें बड़ी संख्या में बच्चों और औरतों समेत 160 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। पार्टी की नजर में मानवता के प्रति अपराध ये हमले इजरायली बर्बरता को सामने लाते हैं। इजरायल अपने पुराने रवैये की तरह अंतर्राष्टीय कानूनों, जिनके तहत सभी लोगों को जीवन रक्षा का अधिकार है, का खुला उल्लंघन कर रहा है। निर्दोष लोगों की हत्याओं के समर्थन में दिए जाने वाले उसके तर्क का कोई औचित्य नहीं हैं। हवाई हमलों के पहले भी उसने फिलस्तीनी बच्चों को अगवा कर जेलों में डाल रख कर यंत्रनाएं दी हैं। इजरायल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कहने के बावजूद हवाई हमले रोकने के लिए तैयार नहीं है। उल्टे वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतानयाहु ने कहा है कि आपरेशन जारी रहेगा और कहा नहीं जा सकता कितना लंबा समय लगेगा। उन्हें हमलों के लिए खुला अमेरिकी समर्थन है। इजरायली वायुसेना ने परचे गिरा कर लोगों को घर छोड़ने की चेतावनी दी है। डरे हुए लोग घरों से भाग रहे हैं। यह जाहिर है कि इजरायल ने हवाई हमले और तेज करने के साथ जमीनी युद्ध का इरादा भी बना लिया है। इससे और ज्यादा हत्याएं और तबाही होगी।
पार्टी महासचिव व प्रवक्ता प्रेम सिंह ने कहा कि भारत के फिलीस्तीन के साथ पुराने रिश्तों को ध्यान में रखते हुए देखें तो हमलों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया, जो उसने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के माध्यम से दी है, नितांत अपर्याप्त है। सरकार को विदेश मंत्री की मार्फत हमलों की निर्णायक रूप से निंदा करनी चाहिए थी और मामले को अंतराष्ट्रीय मंच पर उठा कर उन्हें तुरंत बंद करने का दबाव बनाना चाहिए था।
श्री सिंह ने कहा कि एक समय था जब फिलीस्तीनी लोगों का हित भारत का प्रमुख सरोकार था और फिलीस्तीनी संघर्ष के प्रतीक यासर अराफात देश में जाना-माना नाम थे। बुद्धिजीवी और नागरिक समाज भी फिलीस्तीनी हित का समर्थन करते थे। नब्बे के दशक के शुरू में अमेरिका-ब्रिटेन द्वारा निर्देषित नवउदारवादी नीतियों को देश में थोपे जाने के बाद से चीजें तेजी से बदलती चली गईं। उन्होंने कहा कि 1998-2004 की भाजपा नीत एनडीए सरकार ने देश की विदेश नीति को पूरी तरह उलट कर भारत की नियति को अमेरिका-इजरायल की धुरी से बांध दिया। नवउदारवादी भारत की सरकारें अमेरिका को खुश रखने के लिए इजरायल का समर्थन करती हैं और उसके द्वारा फिलीस्तीनियों पर किए जाने वाले अत्याचारों पर चुप्पी साध लेती हैं। ‘हमेशा शक्तिशाली के साथ रहो’ - नवउदारवादी भारत का यह मूलमंत्र बन गया है।
मध्यपूर्व, अफगानिस्तान और पाकिस्तान नवउदारवादी तथा तानाशाही/ चरमपंथी ताकतों का युद्धक्षेत्र बना हुआ है। ये दोनों एक-दूसरे के कीटाणुओं पर पलते हैं। इस पूरे क्षेत्र में गृहयुद्ध जैसी स्थिति का भारत पर गंभीर असर आयद होता है। लेकिन भारत के शासक वर्ग की अमेरिका का पिछलग्गू बनने के अलावा अपनी कोई भूमिका नहीं रह गई है। भारत की सरकारों के इस अधीनस्थ रवैये ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में देश के हितों को खतरे में डाल दिया है। यही वह पृष्टभूमि है जिसके चलते मौजूदा सरकार ने इजरायल के फिलीस्तीनी नागरिकों पर नृशंस हमले की कड़ी निंदा नहीं की है।
सोषलिस्ट पार्टी ने इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए फिलीस्तीन की जनता, जो पिछली आधी सदी से ज्यादा समय से अपने जीवन और मातृभूमि पर जियनवादी हमले झेल रही है, के साथ सोलीडेरिटी का इजहार किया है। पार्टी भारत के समस्त शांतिप्रिय लोगों से अपील की है कि वे हमलों को तुरंत बंद करने के लिए अपनी आवाज उठाएं। पार्टी ने विश्व समुदाय से भी अपील की है कि वह प्रमुख लोगों/संस्थाओं पर दबाव बनाए कि इस क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे राष्ट्रीय, जातीय और सांप्रदायिक विवादों का बिना और समय गंवाए राजनीतिक समाधान निकालें। अंत में सोशलिस्ट पार्टी न ‘हमास’ से कहा है कि वह निर्दोष फिलीस्तीनी और इजरायली नागरिकों का जीवन बचाने के लिए बदले की हिंसक कार्रवाई छोड़े और फिलीस्तीनी पक्ष में विश्व जनमत बनाने का काम करे।