दो लोरियाँ
इन दस दिनों में चैनलों की पुलिसिया और पुलिस कमिशनर से लेकर एस पी - दरोगा की जिला संवाददाता टाइप भूमिका के अलावा बहुत बढ़िया संगीत भी सुना......... दो पेन ड्राइव में पांच सौ गाने......... चार सौ कैसेट बोर में पड़े हैं ....... सोनी नाम के उस डिब्बे को उनसे कोई लगाव नहीं रह गया है …… पेन ड्राइव ने बचा लिया.......
इस एकांत की संगीत सभा में एक ज़बरदस्त खुलासा हुआ कि हिंदी फिल्मों के गानों में दो ऐसी लाजवाब लोरियाँ हैं जो किसी शिशु के लिए नहीं बल्कि एक युवती के लिए दो अलग अलग फिल्मों के हीरो ने गायीं ...... वो युवती हैं नूतन...... शायद एकमात्र अभिनेत्री...... पहली फिल्म थी शबाब..... 1955 की इस फिल्म में नूतन राजकुमारी के रोल में हैं ..... उन्हें नींद न आने की बीमारी थी … राजा के एलान करने पर बहुत सारे गवैये आते हैं और भगा दिए जाते हैं ...... तब आवारा गायक भारत भूषण को मौक़ा मिलता है
हेमंत कुमार की आवाज़ में पहली दो पंक्तियाँ एक दोहे के रूप में हैं और जैसे जैसे वो उभरता है निस्तब्धता छाती जाती है और आप खुद बुत बन जाते हैं दोहा ख़त्म होते होते सितार की हलकी हलकी लहरियाँ आपको इस दुनिया में ले आती हैं और चन्दन का पलना रेशम की डोरी … उस स्वर्ग का विस्तार बन जाती हैं …… मेरी नज़र में यह नौशाद की सर्वश्रेष्ठ रचना है .... लेकिन हेमंत उनकी संगीत अदायगी में फिट नहीं बैठते थे, इसलिए हेमंत से उन्होंने बस एक गीत और गवाया था ..... इन्साफ की डगर पे..... गंगा जमुना में
दूसरी लोरी बारह साल बाद आयी फिल्म मिलन में .... सुनील दत्त विधवा होने का दंश झेल रही नूतन के लिए गाते हैं...... आवाज़ मुकेश की और संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल का..... मुकेश की आवाज़ का जादू अपनी जगह था ..... उस जादू में जुड़ रहा था नूतन का विधवा होने का दंश .... और उस पीड़ा का बयान सुनील दत्त के चेहरे पर कुछ ऐसा पड़ रहा था कि समझ में नहीं आ रहा था कि कौन किसकी पीड़ा हर रहा है..... हलकी सी सिसकी ज़रूर उठ रही थी हवा के झौंकों में ... एल पी की सर्वश्रेष रचना …।
यह एक अजीब बात है कि लोरी गाना नारी के गुणों में शुमार किया जाता है लेकिन हमारी फिल्मों में ज़्यादातर बेहतरीन लोरियाँ पुरुष आवाज़ में हैं …
उनके बारे में फिर कभी
राजीव मित्तल
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जबलपुर में ‘नई दुनिया’ के स्थानीय संपादक, और मेरठ में ‘हिंदुस्तान’ के स्थानीय संपादक रहे राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं। ‘अमर उजाला’ और ‘दैनिक हिंदुस्तान’ होते हुए अब आगरा से छपने वाले ‘पुष्प सवेरा’ में सम्पादक रहे मित्तल जी नव भारत टाइम्स एवं ‘जनसत्ता’ (चंडीगढ़) में मुख्य उप सम्पादक भी रहे हैं।