अशोक बंसल
मथुरा। कृष्ण नगरी मथुरा के चुनावी मैदान में भाजपा की टिकिट पर चुनाव लड़ रही हेमा मालिनी ने जबर्दस्त धूम मचा दी है। हेमामालिनी के चुनाव प्रचार के तौर तरीके एकदम निराले हैं। अन्य दलों के उम्मीदवार चाहे कितनी ही दौलत के स्वामी क्यों न हों, वोट हथियाने के लिए "सादा जीवन-उच्च विचार" का दिखावा कर रहे हैं। जबकि हेमा "ऊंचा जीवन -ऊँचे विचार" का सन्देश देने में कोई संकोच नहीं कर रही हैं। मजेदार और चौंकाने वाली बात यह है क़ि महारानी जैसे ठाठ वाली इस विलक्षण उम्मीदवार के दीदार के लिए वोटर बेताब हैं।
शान शौकत में रची बसी हेमा अपने लिए नहीं मोदी के लिए चुनाव लड़ रही हैं। इस बात के संकेत वह जगह जगह अपनी संक्षिप्त तकरीर में दे रही हैं। हेमा को निहारने वालों में महिलाओं और नौजवान ज्यादा हैं। हेमा अपने संक्षिप्त भाषण में वोटरों से सीधा संवाद कर रही हैं,जैसे - "बताओ,गुजरात का मुख्यमंत्री कौन है" या "मोदी ने गुजरात में काम किया ?" वोटरों से 'हाँ' कहलवाती हेमा मुस्कराती हैं। नाज नखरे वाली हेमा के फ़िल्मी आंदज़ मथुरा की सड़कों पर देख लोग हैरत में हैं। एक सभा में अपने ऊपर फूल बरसाने वालों पर बरसती हेमा बोलीं-"मेरे ऊपर फूल मत बरसाओ, इनमें कीड़े होते हैं। मुझे यह पसंद नहीं।" विश्राम घाट पर पूजा अर्चना करती हेमा एक भाजपाई पर ऐसे बरसी जैसे किसी फिल्म में विलेन पर कोई हीरो बरसता है। विरोधी उम्मीदवार हेमा को बाहरी बताकर आक्रमण कर रहे हैं। हेमा अपना बचाब कुछ इस तरह कर रही हैं -"जी हाँ, मैं बहार की हूँ, तभी तो मुझे मथुरा की समस्याएं दिखाई दे रही हैं। आपको तो टूटी सड़कें भी दिखाई नहीं दे रहीं।पता नहीं आप लोग इन सडकों पर कैसे चलते हैं। यहाँ के सांसदों ने शहर के लिए क्या किया !" अपने बाहरी होने के आरोप पर उन्होंने कहा "यहाँ के लोगों ने मथुरा को कौन सा सुधार दिया। मैं लम्बे समय से यहाँ आती हूँ, यहाँ की समस्याएं मुझे अच्छी तरह मालूम हैं।"
हेमा ने अपना चुनावी ठिकाना मथुरा के शानदार "राधा अशोक" होटल को बनाया है। करीब ८ अंगरक्षक(बाउंसर ) हेमा के साथ मुम्बई से आये हैं। ये बाउंसर होटल में तैनात हैं। सूत्रों के मुताबिक चुनाव के दौरान हेमा के मथुरा प्रवास के सारे सुख सुविधा वाले इंतजाम मथुरा के एक उद्योगपति की देखरेख में हो रहे हैं न किसी भाजपा नेता द्वारा किये जा रहे हैं। उद्योगपति के कांग्रेसी नेताओं से करीबी सम्बन्ध है और वह मुंबई में हेमा का पड़ोसी है। हेमा अपनी बेशकीमती 'आउडी' शीशाबंद कार में बैठकर ही जनसम्पर्क कर रही हैं। कार की छत में लगी खिड़की से वे अपने चेहरे को बाहर निकालकर बार-बार हाथ जोड़ती हैं। भीड़-भाड़ के कारण उन्होंने कार से निकलकर पैदल चलने से मना कर दिया। इस बात की आलोचना हुई तो एक दिन एक खेत में घास काटती महिलाओं के पास पंहुची और हाँसिया पकड़ घास काटने लगी। खूब फोटो खिंचवाए। ऐसे अभिनय का उन्हें अभ्यास है।
मथुरा भाजपा के नेता अपनी प्रत्याशी हेमा मालिनी से दूर-दूर महसूस कर रहे हैं। हाशिये पर खड़े भाजपा पदाधिकारी बात बात में आपस में उलझ रहे हैं। जिला अध्यक्ष डॉ. डी पी गोयल को भाजपा के पूर्व मंत्री रविकांत और पूर्व सांसद तेजवीर सिंह ने ने चुनाव प्रचार में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर खरी खोटी सुनाई। नेताओं की आपसी जूतमपैज़ार से हेमा का कोई लेना देना नहीं। मथुरा भाजपा के बूढ़े नेता हेमा से दूर हैं पर छुटभैय्ये नेता और कार्यकर्त्ता हेमा के जयकारे बोल उनके साथ अपने फोटो खिंचाने में गदगद हैं। हेमा की प्रचार टीम आयातीत है।
हेमा मालिनी की छोटी बेटी आहना अपने पति के साथ माँ के मनोबल एक बार मथुरा आकर बढ़ा चुकी है। एक बातचीत में हेमा ने दूसरी बेटी और पति धर्मेन्द्र के जल्द ही मथुरा आने की बात कही है। फ़िल्मी दुनिया की जानकारी रखने वालों का कहना है कि धर्मेन्द्र हेमा के चुनाव लड़ने पर नाखुश हैं। अत:वे मथुरा आने से कन्नी काटेंगे। समझा जाता है कि जाट वोटरों में सेंध लगाने के लिए धर्मेन्द्र को मथुरा बुलाने के लिए भाजपा नेता हेमा की मिन्नतें कर रहे हैं।
हेमामालिनी के चुनाव मैदान में होने से रालोद के जयंत चौधरी की सिट्टी पिट्टी गुम है। मजेदार बात यह है कि पिछले चुनाव में रालोद और भाजपा का गठबंधन था। जयंत यंहा से लड़े और भरी मतों से जीते। तब जयंत के लिए हेमामालिनी मथुरा आई थीं। यह बात हेमा बड़े निराले अंदाज में कह रही हैं —-"पिछले चुनाव में मैं जयंत को जिताने आई थी,आज हराने आई हूँ।"
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क