जुगनू शारदेय

आ गया – आ गया असली वाला बजट । हर साल आता है । इसका आना कोई खबर नहीं है । पर इसमें से खबर निकाली जाती है । इसमें कुछ न कुछ जनता को दिया जाता है । कुछ कुछ जनता से लिया जाता है । लेने देने का खेल तब से चल रहा है , जब से बजट का खेल चल रहा है । इस खेल के खिलाड़ियों की कुछ राय बजट की तरह ही पक्की होती है । जैसे प्रणव बाबू के बजटाना पर प्रधान मंत्री बहुत ही महान बजटाना मानेंगे । लोक सभा और राज्य सभा में नेता विरोधी दल सुषमा स्वराज और अरुण जेटली इसे चिरकुटाना मानेंगे ।
ऐसी हालत में बड़ा संकट होता है पूर्व वित्तीय मंत्रियों को अपनी राय देने का । अब हमारे देश में पूर्व मंत्रियों की कमी नहीं है । इस बजट पर पी चिदंबरम साहब की प्रतिक्रिया समझना बड़ी भारी राजनीति है । उनकी प्रतिक्रिया ही अपने आप में बड़ी भारी राजनीति है । फिर एनडीए के खाते में दो यशवंत हैं । एक तो य़शवंत सिन्हा जो अपने जमाने में रॉलबैक सिन्हा जाते थे । फिर जसवंत सिंह जो वित्त मंत्री के रूप में कुछ भी नहीं जाने जाते कि भारत उदय उनका ही ख्याल था । भाजपा का तब से इतना भारत उदय हो चुका है कि पूरी पार्टी ही भ्रामक भारत निर्माण में फंसी हुई है ।
समझदारों को उम्मीद थी कि यह बजट बड़ा भारी क्रांतिकारी होगा । कुछ लोगों का ख्याल था कि अनेक राज्यों में होने वाले चुनाव के कारण महान भ्रांतिकारी होगा । बस एक ही भ्रांति से यह बजट मुक्त है कि यह महंगाई को खत्म करने के लिए ज्योतिषियों की शरण में नहीं जाता । यह तो 2012 में जाता है । चलो इतना सह लिया तो एक साल और सही । अब बचे वह जो ब्रोकेन न्यूज पर इस बजट की खींच तान करते हैं । बड़े महान लोग हैं कि सुन सुन कर ही सब समझ जाते हैं ।
बिना कोई सेवा दिए सेवा कर खत्म नहीं हो सकता है । सो बना हुआ है दस प्रतिशत की दर पर । थोड़ा महंगा हुआ हवाई जहाज का देसी – विदेशी सफर ।
समझदार बताते हैं कि यह बजट कृषि वालों की बढ़ोत्तरी करेगा । हमने कुछ खेती वालों से बातचीत की । उन्होने कहा कि हमें तो कुछ समझ में न आया कि खाद की चोरबाजारी करने वाला क्या इससे सुधर जाएगा । किरासन तेल को मिट्टी का तेल बनाने वाला क्या सुधर जाएगा ।
नरेगा का मुआवजा अब प्राइस इंडेक्स से जुड़ जाएगा । भारत निर्माण के लिए पैसा बढ़ गया है । 25 लाख में भारत में झोंपड़िया तो मिल ही जाएंगी । पहले 1 लाख 60 की सालाना कमाई पर इनकम टैक्स से मुक्ति मिल जाती थी , अब 1 लाख 80 हजार की कमाई पर छूट मिलेगी । हर बड़ा धनपशु इसे सुधारात्मक बजट मानता
है । बुजुर्गों को काफी राहत है 60 साल की उम्र से ही आय कर का दाखिला नहीं भरना पड़ेगा । और तो और गंगा के अलावा बाकी नदियों का भी ध्यान रखा गया है ।
इस बजट के बजटाना में ढेर सारे चिरकुटाना है तो कुछ गदहदाना भी है । बस बात वही है कि जो पैसा गांव के लिए है , वह गांव तक कितना पहुंचेगा ।
साहब , यह तो वित्त मंत्रालय का काम नहीं है । किसी और मंत्रालय का काम है – फिर वहां से राज्यों में माल जाएगा । पता नहीं किसने कहा है कि पैसा काला भी होता है । कुछ लोग कहते हैं कि इसी रास्ते से भी होता है ।