बजाज एनर्जी के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर रही यूपी सरकार ?
बजाज एनर्जी के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर रही यूपी सरकार ?
एमओयू आधारित सभी बिजली परियोजनाओं का करार रद्द करो
बजाज एनर्जी के साथ करार रद्द न हुआ तो ललितपुर से उप्र को लगभग 10 रु प्रति यूनिट की बिजली खरीदनी होगी
660 मेगावॉट की देश में अन्य परियोजनाओं की लागत ललितपुर की तुलना में काफी कम
सभी निजी बिजली परियोजनाओं का सीएजी आडिट हो
लखनऊ। आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने बजाज एनर्जी द्वारा ललितपुर थर्मल प्रोजेक्ट की लागत में भारी वृद्धि को ब्लैकमेल और धोखाधड़ी बताते हुए कहा है कि ललितपुर सहित एमओयू आधारित सभी बिजली परियोजनाओं के करार तत्काल रद्द किये जाएँ, अन्यथा इन परियोजनाओं से बिजली खरीदने में उप्र पावर कार्पोरेशन दिवालिया हो जायेगा और उप्र की आम जनता देश में सबसे महंगी बिजली खरीदने हेतु विवश होगी।
फेडरेशन ने एमओयू आधारित बिजली परियोजनाओं के मनमाने पन पर रोक लगाने हेतु उप्र के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव से प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की है। फेडरेशन ने कहा है कि विगत कुछ वर्षों से चल रहे घटनाक्रमों को देखते हुए स्पष्ट हो गया है कि उप्र विद्युत नियामक आयोग अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहा है, ऐसे में सरकार को जनहित में कठोर कदम उठाना ज़रूरी है। ललितपुर सहित सभी निजी बिजली परियोजनाओं का सीएजी द्वारा आडिट कराया जाये तो भारी घोटाला सामने आएगा।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 660 मेगावाट क्षमता की सुपर क्रिटिकल थर्मल इकाइयाँ उप्र में मेजा में एनटीपीसी और उप्र विद्युत उत्पादन निगम के संयुक्त क्षेत्र में लग रही हैं। मेजा में 1320 मेगावाट की लागत लगभग 6200 करोड़ रु है, जो लगभग 4.6 करोड़ रु. प्रति मेगावाट आती है, फिर ललितपुर में यह लागत 8.4 करोड़ रु प्रति मेगावाट बताना जालबट्टा और धोखाधड़ी है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में बरेठी में एनटीपीसी 660 मेगावाट की 4 यूनिट 9020 करोड़ रु में लगा रही है, जो 3.4 करोड़ रु. प्रति मेगावाट है।
इसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खण्डवा के पास श्री सिंगाजी थर्मल प्रोजेक्ट में 660 मेगावाट की दो यूनिट 6500 करोड़ रु में लगाई जा रही हैं, जो 4.9 करोड़ रु. प्रति मेगावाट है। राजस्थान के बांसवाड़ा में सरकार द्वारा 660 मेगावाट की दो यूनिट 7520 करोड़ रु में लगाई जा रही हैं, जो 5.6 करोड़ रु. प्रति मेगावाट है और मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा हाल ही में संचालित 600 मेगावाट की दो यूनिट 7820 करोड़ रु में लगी हैं, जो 6.5 करोड़ रु प्रति मेगावाट आता है।
उन्होंने बताया कि देश की सबसे बड़ी इकाई गुजरात में वाणकबोरी में 800 मेगावाट की यूनिट 3490 करोड़ रु में लग रही है जो 4.36 करोड़ रु प्रति मेगावाट आती है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन पूरे देश के आंकड़े दे सकता है और यह स्पष्ट है कि बजाज द्वारा ललितपुर के लिए बताई गयी 8.4 करोड़ रु प्रति मेगावाट की लागत देश में सबसे अधिक है जो निश्चय ही फर्जीवाड़ा है। इस जालसाजी की सीएजी जाँच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उप्र सरकार ने ललितपुर में बजाज को कोयला आयात करने की अनुमति दे दी है जो बहुत आत्मघाती निर्णय है । ध्यान रहे कि आयातित कोयला भारतीय कोयले के मुकाबले चार गुना महँगा है और चूँकि ललितपुर किसी भी बंदरगाह से कम से कम 1200-1500 किलोमीटर दूर है अतः आयातित कोयले की ढुलाई काफी महंगी पड़ेगी । उन्होंने कहा कि सामान्यतया आयातित कोयले की अनुमति बंदरगाह के निकट की बिजली परियोजनाओं को दी जाती है किन्तु बजाज को ललितपुर में पहले आयातित कोयले की अनुमति देना और अब 8.4 करोड़ रु प्रति मेगावाट की लागत बताने के चलते ललितपुर से प्रदेश को लगभग 10 रु प्रति यूनिट तक की बिजली खरीदनी पड़ सकती है ।
उन्होंने कहा कि एम ओ यू आधारित बिजली परियोजनाओं में लागत के इसी फर्ज़ीवाड़े को देखते हुए आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की पहल पर केंद्र सरकार ने एमओयू रुट पर 05 जनवरी 2011 से प्रतिबन्ध लगा दिया है, किन्तु उप्र में 05 जनवरी 2011 के बाद भी एम ओ यू आधारित ऐसी बिजली परियोजनाओं को एक्सटेन्शन दिया जा रहा है जिन्होंने पांच साल बाद काम तक शुरू नहीं किया जो एक तरह से नयी स्वीकृति के समतुल्य है जिसे रद्द किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि रिलायन्स रोजा, बजाज एनर्जी, जे पी की बारा परियोजना और आगरा में टोरेंट के मामले में हज़ारों करोड़ रु के घोटालों का सी ए जी द्वारा पर्दाफाश किये जाने के बाद उप्र विद्युत नियामक आयोग की विश्वसनीयता समाप्त हो गयी है अतः मुख्यमन्त्री को समय रहते प्रभावी कार्यवाही करनी चाहिए जिससे महंगी बिजली का अनावश्यक बोझ आम लोगों पर न पड़े।


