अयोध्या। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के विवादित बयानों से क्षुब्ध होकर चिश्ती सद्भावना पुरस्कार से सम्मानित महंत युगलकिशोर शरण शास्त्री ने उन्हे बर्खास्त करने की मांग की है।
शास्त्री जी ने कहा कि वे शीघ्र ही इस प्रकरण पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर महामहिम राष्ट्रपति के पास भेजेंगे। उन्होंने राज्यपाल पर शीघ्र कड़ी कानूनी कारवाई करने की मांग की। शास्त्री ने कहा कि राज्यपाल जैसे ओहदे पर आसीन होकर अयोध्या की मस्जिद की भूमि पर मंदिर बनाने की वकालत करना, उनके पद की गरिमा के खिलाफ है।
शास्त्री ने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से रामनाईक उत्तर प्रदेश ही नहीं अपितु पूरे देश को दंगों की आग में झोंकने का षडयंत्र कर रहे हैं। अयोध्या में सद्भावना केंद्र बनाने की ज़रूरत है ना की राम मंदिर की। इससे देश की साझी विरासत को मजबूती मिलेगी। जिसके लिए हम लोग वर्षों से प्रयासरत हैं।
महंत युगलकिशोर शरण शास्त्री ने कहा कि राज्यपाल रामनाईक अपने विवादित भाषणों से अयोध्या तथा हिन्दू सनातन धर्म की मान मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अयोध्या मे विवादित भूमि पर ना मंदिर बन सकता है ना मस्जिद बन सकती है। इस प्रकार के बयानों से राज्यपाल को बचना चाहिए था, क्योंकि अयोध्या के मुद्दे पर न्यायालय मे मुकदमा विचाराधीन है।