#बलात्कार का आह्वान करने वाले #आदित्यनाथ के #इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आने से कलंकित होगा पूरब का ऑक्सफोर्ड- रिहाई मंच
#बलात्कार का आह्वान करने वाले #आदित्यनाथ के #इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आने से कलंकित होगा पूरब का ऑक्सफोर्ड- रिहाई मंच
खुफिया विभाग और पुलिस को हो जाना चाहिए सचेत, इलाहाबाद में हो सकते हैं हिंदुत्ववादी आतंकी मॉड्यल
लखनऊ 19 नवम्बर 2015। पूर्वी उत्तर प्रदेश में विभिन्न सांप्रदायिक हिंसा व आतंकवादी घटनाओं में सलिप्त रहे गोरखपुर से भाजपा सांसद आदित्यनाथ को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बुलाने पर रिहाई मंच ने कड़ी आपत्ति की है।
आदित्यनाथ जिनका असली नाम अजय सिंह बिष्ट है, की सांप्रदायिक-आतंकी और दलित-महिला विरोधी राजनीति पर केन्द्रित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘सैफ्रन वॉर’ के फिल्मकार शाहनवाज आलम, राजीव यादव व लक्ष्मण प्रसाद ने कहा कि पूरब के आक्सफोर्ड में आतंक के आरोपी को बुलाने से पूरी दुनिया में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छवि कलंकित होगी। जिन आदित्यनाथ के मंच से लड़कियों को उठाकर ले आने की बात ही नहीं बल्कि कब्रों से निकालकर बलात्कार करने जैसी घृणित अपराध के आह्वान होते हों उन्हें बुलाने वाले विश्वविद्यालय के उन छात्र नेताओं और विश्वविद्यालय प्रशासन को बताना चाहिए कि क्या वे आदित्यनाथ के इन महिला विरोधी आह्वानों के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा इलाहाबाद जिस गंगा-यमुना के संगम पर बसा है को आदित्यनाथ और उनकी सहयोगी महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे की बेटी व आतंकी संगठन अभिनव भारत की प्रमुख हिमानी सावरकर एटीएस की चार्जशीट के मुताबिक अपने आतंकी गतिविधियों के जरिए नेस्नाबूत करना चाहते थे। जिस शख्स का नाम आतंक के आरोपी असीमानंद ने लिया और जिसकी समझौता एक्सप्रेस, मालेगांव, मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह में हुई आतंकी वारदातों में सलिप्तता पाई गई वो आदित्यनाथ इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों को कौन सी शिक्षा देना चाहते हैं इसको आयोजकों को साफ करना चाहिए।
‘सैफ्रन वॉर’ के फिल्मकारों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और खुफिया विभाग को मुस्तैद रहने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें इस बात की जांच करनी चाहिए कि इलाहाबाद में कहीं हिंदुत्ववादी आतंकियों का कोई स्लीपिंग मॉड्यूल तो नहीं सक्रिय है जिसे एक्टीवेट करने के लिए आदित्यनाथ आ रहे हैं।
शाहनवाज आलम, राजीव यादव और लक्ष्मण प्रसाद ने कहा कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय जैसे विश्व प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान को आतंक की नर्सरी बताने वाले आदित्य नाथ को बताना चाहिए कि वे 2004 से लेकर 2007 तक अलीगढ़ विश्वविद्यालय की सर्वोच्च डिसिजन बॉडी ‘विश्वद्यिालय कोर्ट’ के सदस्य क्यों रहे हैं।


