बस्तर पुलिस ने भयंकर नक्सली सामान ज़ब्त किया है !!!
बस्तर पुलिस ने भयंकर नक्सली सामान ज़ब्त किया है !!!
ध्यान से देखिये यही असली भाजपाई देशद्रोहियों का राज है। इसे नष्ट करना ही आदिवासियों और देश को बचाने का एकमात्र रास्ता है
दलितों की बस्तियां जला दिया जाना और उनके आरोपियों को बरी कर दिया जाना आतंकवाद है या नहीं ?
हिमांशु कुमार
घोषणा
वो राष्ट्रवादी हैं
इसलिए उनके सभी विरोधी राष्ट्र द्रोही माने जाएँ
वो संस्कृति के रखवाले हैं
इसलिए उनके सभी विरोधी
देश की महान संस्कृति के विरुद्ध माने जायें
वो गर्व से कट्टर धार्मिक हैं
इसलिए उनके सभी विरोधी
धर्म विरुद्ध माने जाएँ
वो सर्व प्रिय हैं इसलिए उनके विरोधी
सबके शत्रु माने जाएँ
और उनके साथ शत्रुवत व्यवहार हो
आप भी देख लीजिये। भाजपा की सरकार ने दावा किया है कि, छत्तीसगढ़ में बस्तर पुलिस द्वारा अपनी जान पर खेल कर भयंकर नक्सली सामान ज़ब्त किया गया है। इस सामान में निम्न खतरनाक देशद्रोही वस्तुएं आदिवासियों से ज़ब्त करी गयी हैं - चार जोड़ी चप्पल, दो शाल, एक पाजामा और बनियान, दो लेडीज शाल, एक सब्ज़ी काटने का चाकू, एक मोबाइल, एक घनुष, कुछ तीर, दो खाली झोले, एक टार्च, एक पेन, एक हेयर बैंड, एक बांसुरी, एक चिड़िया का पंख।
इतना सारा नक्सली सामान ज़ब्त करने के बाद भी सुकमा का जज इन अदिवासियों को नक्सली नहीं मानता था। इसलिये छत्तीसगढ़ की राष्ट्रवादी सरकार ने उस जज को नौकरी से हटा दिया। वो जज आजकल छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार की असलियत बताने के लिये गांव-गांव भटक रहा है। ध्यान से देखिये यही असली भाजपाई देशद्रोहियों का राज है। इसे नष्ट करना ही आदिवासियों और देश को बचाने का एकमात्र रास्ता है।
मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ से कहा है कि वो आतंकवाद पर काबू लगाए अन्यथा संयुक्त राष्ट्र संघ अप्रासंगिक हो जायेगा।
मोदी जी ने यह भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ आतंकवाद को परिभाषित करे।
सुन कर मुझे झटका सा लगा।
मैंने सोचा कि हम आतंकवाद को परिभाषित करने के लिए भी किसी दूसरे के ऊपर निर्भर क्यों हैं ? हर व्यक्ति को आतंकवाद को समझना और परिभाषित करना चाहिये।
मैं अपनी समझ से आतंकवाद को सरल रूप में परिभाषित करने की कोशिश करता हूँ।
किसी भी व्यक्ति या समुदाय को डराने और आतंकित करने के लिए किया जाने वाला कोई भी काम आतंकवाद है चाहे वो किसी भी उद्देश्य से किया गया हो।
डराने और आतंकित करने का काम करने वाले निम्नांकित में से कोई भी हो सकते हैं
कोई क्षेत्रीय संघ या संगठन
कोई धर्मिक समूह
कोई व्यक्ति
कोई राजनैतिक संगठन
सरकारें
अब हम इस आधार पर आतंकवाद की कुछ घटनाओं की पड़ताल करते हैं।
दलितों की बस्तियां जला दिया जाना और उनके आरोपियों को बरी कर दिया जाना आतंकवाद है या नहीं ?
भारत के धार्मिक अल्पसंख्यकों को सरकारी पुलिस द्वारा निशाना लगा कर मार डाला जाना और आरोपी पुलिस वालों को बरी कर दिया जाना आतंकवाद है या नहीं ?
देश भर के किसानों से ज़मीनें छीनने के लिए पुलिस को भेजना, किसानों को जेलों में डाल देना, उनके घर तोड़ देना आतंकवाद है या नहीं ?
आदिवासियों के इलाके में खनिजों पर अमीर कंपनियों का कब्ज़ा करवाने के लिए आदिवासियों के गाँव जला देना, आदिवासी महिलाओं से बलात्कार करना, आदिवासियों की हत्या करना आतंकवाद है या नहीं ?
महिलाओं को थाने में ले जाना उनसे बलात्कार करना उनके गुप्तांगों में पत्थर भर देना, महिलाओं के मुंह पर एसिड पोत देना आतंकवाद है या नहीं ?
किसी के घर में घुस जाना और फ्रिज में रखे मांस को गोमांस की अफवाह उड़ा कर किसी की हत्या कर देना आतंकवाद है या नहीं।
राजधानी की पुलिस के सबसे बड़े अधिकारी द्वारा फर्ज़ी वीडियो बना कर छात्रों को देशद्रोही बताना और जेल में डाल देना आतंकवाद है या नहीं ?
पुलिस द्वारा हैदराबाद विश्वविद्यालय की लड़कियों से कहना कि हम तुम्हारे साथ रेप कर के तुम्हें नंगी कर के पूरे शहर में घुमाएंगे आतंकवाद है या नहीं ?
अगर यह सब आतंकवाद है तो आपने भारत राज्य के मुखिया होने के नाते इसे कभी आतंकवाद क्यों नहीं माना ?
और आपने इन आतंकवादी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ क्यों नहीं किया ?
मोदी जी आपने अपने वक्तव्य में यह भी कहा है कि हमारा आतंकवादी और तुम्हारा आतंकवादी कोई नहीं होता, आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है।
तो अगर यह सब घटनाएँ आतंकवादी घटनाएँ है और इनमें राज्य, सत्ता और ताकतवर समुदाय के लोग शामिल हैं तो आप इन के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं ?
और अगर आप अपने हिस्से के विश्व में आतंकवाद को रोकने के लिये कार्यवाही करने के लिए तैयार नहीं हैं तो संयुक्त राष्ट्र संघ से आतंकवाद रोकने की मांग करना क्या आपका पाखंड नहीं है ?
आतंकवाद पर काबू ना लगाने के कारण अगर संयुक्त राष्ट्र संघ अप्रासंगिक हो सकता है तो अपने देश के भीतर सरकारी और शक्तिशाली समुदाय के आतंकवाद पर काबू ना लगा पाने के कारण भारतीय राज्य भी अप्रासंगिक हो सकता है।
इसलिए अगर आपको सचमुच भारत राज्य और शासन को बचाना है तो आतंकवाद पर कार्यवाही करिये।
मोदी जी हम दुनिया से आतंकवाद को सचमुच खत्म करना चाहते हैं।
जनता आतंकवाद के तले कराह रही है।
करोड़ों किसान, आदिवासी, दलित आतंक की चक्की में पिस रहे हैं और आप इस आतंकवादी कामों के मुखिया बने हुए हैं।
आतंकवाद को समाप्त कीजिये।


