बहिन जी के राज में बाबा साहब को ख़तरा
बहिन जी के राज में बाबा साहब को ख़तरा
राजेन्द्र के गौतम
लखनऊ। संविधान रचयिता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अस्थियां और परिसर पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। यूपी विधान सभा के सामने स्थिति डॉ. भीमराव अम्बेडकर महासभा दफ्तर के अगल-बगल के राज्य हज कमेटी, राष्ट्रीय लोकदल और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यालयों को खाली करने का नोटिस सरकार दे चुकी है। अब दलितों के लिए मक्का माने जाने वाले डॉ. भीमराव अम्बेडकर महासभा के परिसर का नम्बर है। परिसर में बाबा साहब के अस्थि कलश रखे हैं। इस मामले पर राज्य सम्पत्ति विभाग के सचिव नवनीत सहगल ने चुप्पी साध ली है। मालूम हो कि राष्ट्रीय लोकदल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और राज्य हज कमेटी को आवंटित भवनों को तुरंत खाली करने को कहा गया है। उन्हें कोई मोहलत नहीं दी गई है। सरकार का मानना है कि राजनीतिक दल अब इन भवनों के लिए अर्ह नहीं रहे। इन स्थानों पर मंत्रियों के लिए बंगले बनेंगे। विशेष सचिव राज्य सम्पत्ति की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है कि शासकीय प्रयोजन के लिए आवास की आवश्यकता होने पर शासन द्वारा आवास का आवंटन निरस्त किए जाने की व्यवस्था नियमों में निहित है। इसके साथ ही यह कहा गया है कि भाकपा का कोई विधायक न होने के कारण पार्टी उक्त कार्यालय के लिए अयोग्य हो गई है। राज्य हज कमेटी का नया दफ्तर अमौसी एयरपोर्ट के पास है। इस वजह से इसे हटाया जाएगा। राष्ट्रीय लोकदल का कार्यालय भारतीय किसान कामगार पार्टी के नाम आवंटित है। इस पार्टी के अपेक्षित संख्या में विधायक न होने के कारण पार्टी की उक्त भवन के लिए अर्हता खत्म हो गई है। इस संबंध में डॉ. भीमराव अम्बेडकर महासभा से जुड़े एक वरिष्ठ कर्मी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने बाबा साहब के इस परिसर को खाली कराने की कोई हिम्मत नहीं की, लेकिन दलितों की रहनुमाई वाली बसपा सरकार परिसर को खाली कराने में जुटी है। अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि फिलहाल सरकार की तरफ से कोई नोटिस नहीं मिली है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पी.एल. पुनिया ने कहा कि वर्तमान सरकार महापुरुषों का सम्मान नहीं करना जानती है। तभी तो अम्बेडकर महासभा के परिसर को खाली कराया जा रहा है। इस मामले पर राज्य सम्पत्ति विभाग के सचिव नवनीत सहगल ने कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से मना कर दिया।
दूसरी ओर सरकार पहले भी अम्बेडकर महासभा के परिसर को कब्जे में करने के लिए प्रयास कर चुकी है। इस कार्यालय का आवंटन पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष पारसनाथ मौर्य के नाम से किया गया था। इस आवंटन को कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद बिफरी मायावती ने राजनाथ सरकार द्वारा दी गई महासभा को सात लाख की वित्तीय सहायता को वापस ले लिया था। 14 अप्रैल 1991 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पत्नी सविता अम्बेडकर ने बाबा साहब के अस्थि कलश को महासभा के परिसर में स्थापित किया था। 1993 में पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायन ने परिसर में बोधवृक्ष को लगाया था। 16 मई वर्ष 1990 में डॉ. अम्बेडकर जन्म शताब्दी समारोह समिति ने भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर महासभा के गठन का निर्णय लिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने महासभा के कार्यालय के लिए विधाानसभा के सामने कोठी नम्बर दस को आवंटित किया था। श्री यादव ने 6 दिसम्बर वर्ष 1990 को महासभा के कार्यालय का उद्घाटन किया था। पांच लाख रुपए की वित्तीय सहायता भी दी थी। मोती लाल बोरा ने अम्बेडकर महासभा कार्यालय को एक रुपए वार्षिक किराए पर 99 वर्ष की लीज पर दिए जाने की घोषणा की थी। पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने महासभा आकर घोषणा की थी कि भगवान बुद्घ की सबसे बड़ी मूर्ति प्रदेश में स्थापित होगी। उन्होंने बाबा साहब की 12 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण भी किया था। सात लाख रुपए की वित्तीय सहायता भी दी थी।
साभार डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट


