बहुत तेजी से फ़ैल रहा है फर्जी देश प्रेम का मानसिक रोग
बहुत तेजी से फ़ैल रहा है फर्जी देश प्रेम का मानसिक रोग
भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना तो देशद्रोह है
भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना देश प्रेम कैसे हो गया ?
संतोष कुमार मौर्या
भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत एक सम्प्रुभता सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है। अगर ऐसा है तो भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना देशप्रेम कैसे हो गया ? जोर जोर से हिन्दू राष्ट्र का नारा लगाना देशप्रेम कैसे हो गया ? अपने ही देश के किसी धर्म विशेष लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काना देश प्रेम कैसे हो गया?
पुलिस वालों और आर्मी वालों तुम भी कान खोल कर सुन लो, भारतीय संविधान का आदर करना और भारत की जनता का हिफाजत करना देश प्रेम हैI भ्रष्ट नेताओं के इशारे पर अपने ही देश के बेगुनाह लोगों का फर्जी इन्कॉउंटर कर डालना देश प्रेम कैसे हो गया ? ये कैसा पागलपन है कि एक तरफ भारतीय संविधान का खुलेआम अनादर कर रहे हैं दूसरी तरफ खुद को राष्ट्रभक्त समझ रहे हैं?
इस फर्जी देशप्रेम के रोग से ग्रसित लोगों को मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि आजादी की लड़ाई लड़ते समय महात्मा गांधी ने ये नहीं कहा था कि मैं गुजरातियों या हिन्दुओं के लिए लड़ रहा हूँ। भगत सिंह ने ये नहीं कहा था कि मैं सिक्खों के लिए लड़ रहा हूँ। चन्द्र शेखर आजाद ने ये नहीं कहा था कि मैं ब्राह्मणों के लिए लड़ रहा हूँ। अशफाक उल्ला खां ने ये नहीं कहा था कि मैं मुसलमानो के लिए लड़ रहा हूँ। सुभाष बाबू ने ये नहीं कहा था कि मैं बंगालियों के लिए लड़ रहा हूँ। ये लोग हिन्दू मुसलमान या किसी धरम के लिए नहीं लड़े थे, बल्कि अपने पूरे भारत देश के लिए लड़े थे। इनमें से कोई हिन्दू,मुसलमान, सिक्ख या ईसाई नहीं था, ये लोग सिर्फ हिंदुस्तानी थे।
इस फर्जी देश प्रेम के रोग से ग्रसित तथा कथित भक्त लोग पहले भारत का संविधान, आजादी की लड़ाई का इतिहास पढ़ें और अपने बुद्धि के बंद दरवाजे को खोलें फिर उसके बाद देश भक्त बनने की कोशिश करें।


