बाज़ार में खिलाड़ी
बाज़ार में खिलाड़ी
फ़ज़ल इमाम मल्लिक
विवादों की धुंध के बीच ही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के नए संस्करण की तैयारी चल रही है। हालांकि विवादों के इस धुंध के अभी छटने के असार दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहे हैं, लेकिन खिलाड़ियों का बाजार लगा और बाजार ने खिलाड़ियों को उनकी हैसियत के हिसाब से बोली लगा कर खरीदा। टीमों की बेनामी मिलकियत, वित्तीय अनियमितता से लेकर कई और विवाद आईपीएल से जुड़े हैं और खेल मैदान से होता हुआ अदालतों तक जा पहुंचा है, इसके बावजूद आईपीएल को लेकर टीम चलाने वालों का उत्साह कम नहीं है। आईपीएल विवाद ने देश की सियासत में तो तूफान खड़ा किया ही, सरकार के सामने भी सवाल खड़े कर डाले थे। इस आईपीएल की वजह से देश के एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा तो दूसरी तरफ जिस शख्स ने आईपीएल को शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, वे आसामान की बुलंदियों से अचानक जमीन पर आ गिरे और आज हालत यह है कि अपना वजूद बचाने के लिए वे अदालतों का चक्कर काट रहे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के कभी सबसे चहेते रहे, आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर के बीच की रस्साकशी ने दोनों को परेशानी में डाला लेकिन इन विवादों का असर आईपीएल की नीलामी पर तो कहीं भी नजर नहीं आया। टीमों की तादाद आईपीएल के नए संस्करण में आठ से बढ़ कर दस हो गर्इं तो जाहिर है कि इससे खिलाड़ियों पर बोली भी ज्यादा लगी और टीम मालिकों के बीच भी खिलाड़ियों की खरीदारी को लेकर खूब खींचतान हुई। आईपीएल के ताजा संस्करण में दो नई टीमें कोच्चि और सहारा पुणे वारियर्स भी मैदान पर अपना दम दिखाने के लिए उतरेंगी।
आईपीएल की नीलामी में खरीदारों ने अपनी-अपनी हैसियत के हिसाब से बोली लगाई और बेहतर टीम बनाने की कोशिश की। हालांकि इस बार खिलाड़ियों की खरीदारी को लेकर कुछ चौंकाने वाली बातें भी सामने आर्इं। महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि इस मंडी में भारतीय खिलाड़ियों की बोली ऊंची लगी। लगभग सभी टीमों ने भारतीय खिलाड़ियों को खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी ली। विदेशी खिलाड़ियों की पूछ आईपीएल में इस बार कम रही तो इसकी वजह टीम प्रबंधन की दूरदर्शिता ही कही जाएगी। कोलकता नाइट राइडर्स और किंग्स इलेवन पंजाब ने पिछली गलतियों से सबक लेते हुए इस बार उन खिलाड़ियों पर दांव खेला है जो टी-20 के फार्मेट में फिट बैठते हैं। इस बार खिलाड़ियों के नाम को नहीं प्रदर्शन को टीमों ने चयन का आधार बनाया है। शायद यही वजह है कि सौरव गांगुली, सनथ जयसूर्या, ब्रायन लारा, क्रिस गेल, पीटर सिडल, वसीम जाफर सरीखे खिलाड़ियों पर नीलामी में किसी ने बोली नहीं लगाई।
फटाफट क्रिकेट के इस संक्षिप्त संस्करण में उन खिलाड़ियों की पूछ ज्यादा रही जो टीम के लिए उपयोगी हैं और बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में श्रेष्ठ हैं। जाहिर है कि ऐसे में टीम मालिकों के सामने उम्र के साथ खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी रहा होगा इसलिए उन्होंने ऐसे तमाम खिलाड़ियों पर पैसा लगाने से परहेज किया जो क्रिकेट के इस संक्षिप्त संस्करण में उनके लिए उपयोगी नहीं थे। हालांकि सचिन तेंदुलकर, शेन वार्न, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण सरीखे खिलाड़ी इसके अपवाद भी कहे जा सकते हैं। वार्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल के पहले सीजन में चमत्कारिक प्रदर्शन किया था और टीम चैंपियन बनी थी। राजस्थान टीम को शायद अभी भी वार्न की कप्तानी से कुछ उम्मीद है इसलिए उसने वार्न को टीम में बनाए रखने का फैसला किया। सचिन तेंदुलकर ने पिछले सत्र में मुंबई इंडियंस के लिए शानदार प्रदर्शन किया था और उनका टीम में बना रहना तय था। पर राहुल द्रविड़ और लक्ष्मण पर बोली लगना थोड़ा चौंकाता है। तो उसी तरह सौरव पर किसी टीम का बोली नहीं लगाना भी उतना ही चौंकाता है।
सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को ऊंचाई के जिस शिखर पर पहुंचाया है वहां उनसे टीमों का इस तरह मुंह मोड़ना हैरत में जरूर डालता है। लेकिन उम्र के जिस पड़ाव पर वे हैं और फटाफट क्रिकेट में जिस तेजी से बदलाव हो रहे हैं वहां सौरव, द्रविड़ और लक्ष्मण अप्रासंगिक से हैं। ब्रायन लारा, सनथ जयसूर्या जैसे खिलाड़ियों को लेकर भी ऐसा ही कुछ कहा जा सकता है। हालांकि सौरव को नीलामी में न लिए जाने की एक वजह विदेशी कोचों का होना भी बताया जा रहा है। सौरव ने मैदान पर आस्ट्रेलियाई दबदबे को उसी अंदाज में चुनौती दी थी जो दूसरी टीमों के साथ आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी अक्सर किया करते थे। जबानी जंग में भी सौरव ने आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को जब तब वार करने में कोताही नहीं की थी। सौरव के इस आक्रामकता ने ही भारतीय टीम का चेहरा बदला और जीत का जज्बा भी जागा। इसलिए आस्ट्रेलिया के अधिकांश खिलाड़ी सौरव को पसंद नहीं करते हैं। भारतीय टीम के कोच ग्रेग चैपल के साथ सौरव के झगड़े जग-जाहिर हैं। सौरव की वजह से ही चैपल की भारतीय टीम से छुट्टी हुई तो ऐसे में आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी नहीं चाहेंगे कि सौरव आईपीएल में भी उनके वर्चस्व को चुनौती दें। यह जानना भी कम दिलचस्प नहीं होगा कि आईपीएल में हिस्सा लेने वाली टीमों के कोच ज्यादातर आस्ट्रेलियाई ही हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि सहारा पुणे वारियर्स की टीम सौरव को खरीदना चाहती थी लेकिन टीम के आस्ट्रेलियाई कोच ने टीम प्रबंधन के सामने यह शर्त रख दी कि उन्हें सौरव या उनमें से किसी एक को चुनना होगा। जाहिर है कि ऐसे में टीम प्रबंधन ने सौरव को खरीदने का ख्याल छोड़ दिया। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सौरव अपने अच्छे दिनों को पीछे छोड़ चुके हैं। हाल ही में रणजी ट्राफी मुकाबलों में सौरव का बल्ला नहीं चमका। अनिल कुंबले की मिसाल उनके सामने है। अनिल कुंबले को जब उनकी फ्रेंचाइजी ने टीम में रखने का फैसला नहीं किया तो उन्होंने क्रिकेट प्रशासन से जुड़ने के कारण नीलामी से खुद को अलग कर उस फजीहत से खुद को बचा लिया जो सौरव झेल रहे हैं।
दरअसल आईपीएल की टीमों ने भविष्य की रणनीति तय की और ब्रांड का भी ध्यान रखा। बाजार में पूछ उसी की होती है जो नाम और काम दोनों में उपभोक्ताओं को लुभाता है। जाहिर है कि फिलहाल गौतम गंभीर, यूसुफ पठान, युवराज सिंह, रोहित शर्मा, सौरभ तिवारी, मनोज तिवारी, मुनाफ पटेल, जहीर खान, राबिन उथप्पा, उमेश यादव सरीखे खिलाड़ियों पर बोली लगाई। विदेशी खिलाड़ियों को लेकर टीमों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई तो इसकी वजह भी बाजार ही रहा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने साफ कर दिया है कि आईपीएल में शामिल खिलाड़ियों का चयन अगर राष्ट्रीय टीमों में हो जाता है तो उन्हें अपने-अपने देशों के लिए पहले खेलना होगा। जाहिर है कि आईपीएल की टीमें नहीं चाहेंगी कि जिन खिलाड़ियों पर उन्होंने पैसा लगाया है वह यूंही इस तरह जाया हो। गंभीर, यूसुफ, उथप्पा, इरफान पठान, युवराज सिंह ही नहीं सौरव तिवारी को जितनी कीमत मिली है उसकी कल्पना तो किसी ने नहीं की होगी। जाहिर है कि टीमों ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ भविष्य पर भी निगाह रखी। दूसरी बात जो इस बार दिखाई दी वह यह कि बड़े नाम वाले खिलाड़ियों को तरजीह कम मिली। इन बड़े खिलाड़ियों के बीच अह्म के टकराव की बातें भी कई बार सामने आर्इं। इसलिए इस बार टीमों ने इस पर भी ध्यान रखा है। कोलकाता नाइट राइडर्स और किंग्स इलेवन पंजाब की टीमों ने पिछले सत्र में जिस तरह का प्रदर्शन किया था, उससे भी शायद उन्हें सबक मिला है इसलिए उन्होंने भी उन खिलाड़ियों पर ही पैसा लगाया जिनका बाजार है। गौतम गंभीर करीब ग्यारह करोड़ और यूसुफ पठान और उथप्पा करीब दस करोड़ में बिकते हैं तो इसकी वजह फटाफट क्रिकेट में उनका प्रदर्शन ही है। सच तो यह है कि क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं रहा है। क्रिकेट बाजार में बदल गया है और आईपीएल एक बड़ा बाजार है, जहां खिलाड़ियों की प्रतिभा पर बोली लगाई जाती है और उनके प्रदर्शन के आधार पर उनकी कीमत तय होती है।


