‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति और खुफिया-सुरक्षा एजेंसियां’ विषयक सम्मेलन के प्रमुख वक्ता वरिष्ठ पत्रकार व लोकतांत्रिक अधिकारवादी नेता गौतम नवलखा होंगे
लखनऊ 15 सितंबर 2014। बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ की 6ठीं बरसी पर ‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति और खुफिया-सुरक्षा एजेंसियां’ विषय पर सम्मेलन का आयोजन यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में 19 सितंबर, दिन शुक्रवार, दोपहर ढाई बजे से रिहाई मंच की तरफ से किया जा रहा है। इसके प्रमुख वक्ता दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार व लोकतांत्रिक अधिकारवादी नेता गौतम नवलखा होंगे।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि पिछले दिनों चाहे लोक सभा चुनावों के दरम्यान हो या फिर उपचुनाव दोनों में ही जिस तरह से लगातार आतंकवाद के नाम पर पहले से ही अपने पास रखे लड़कों की गिरफ्तारियां दिखाकर सांप्रदायिक दलों को चुनावों में राजनीतिक लाभ देने की कोशिश की जा रही है, ऐसे में यह सवाल मौजूं-ए-बहस हो जाता है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2014 में चुनावों के दरम्यान एक लड़के को अजमेर से गिरफ्तार करने का दावा करते हुए उसकी निशानदेही के आधार पर जयपुर, जोधपुर, सीकर से दर्जनों लड़कों को गिरफ्तार किया गया। जबकि उसी समय बांग्लादेश की खबरों के मुताबिक उस लड़के को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने महीनों पहले से बांग्लादेश में रखा था। ठीक इसी तरह हालिया उपचुनाव के दौरान सहारनपुर रेलवे स्टेशन से जिस एजाज को दिल्ली स्पेशल सेल ने गिरफ्तार करने का दावा किया, उसके बारे में यूपी पुलिस ने कहा कि उसकी गिरफ्तारी सहारनपुर से नहीं की गई, क्योंकि अगर उस रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था तो सीसीटीवी फुटेज में दिखना चाहिए था पर ऐसा नहीं है। यूपी पुलिस ने इसे सहारनपुर को बदनाम करने की साजिश भी कहा। एजाज के बारे में आ रहा है कि उसे नेपाल में खुफिया एजेंसियों ने उठाकर रखा था, जिसे चुनावों के दौरान दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल को दे दिया था। जहां इस घटना के बाद यूपी पुलिस को इस झूठी गिरफ्तारी पर दिल्ली स्पेशल सेल के खिलाफ मुकदमा करना चाहिए था लेकिन वह एजेंसियों के दबाव में आकर इस मामले को दबाने में लग गई।
मोहम्मद शुऐब ने कहा कि चुनाव के दौरान पहले से ही उठाए गए लड़कों को जिस तरह से आतंकवाद के नाम पर उनकी फर्जी गिरफ्तारी दिखाकर सांप्रदायिक माहौल बनाकर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां भाजपा के पक्ष में माहौल बना रही हैं, वह पूरी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर मतों का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने का षडयंत्र है। आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट जिसने कचहरी विस्फोटों के आरोपियों तारिक और खालिद की गिरफ्तारी को संदिग्ध बताया था, ने भी इसे स्पष्ट किया है कि मुसलमान लड़कों की फर्जी गिरफ्तारी और बरामदगी सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां आतंकवाद के नाम पर करती हैं। जिनके खिलाफ उन्होंने कार्यवाई तक करने की बात कही। पर कमजोर राजनीतिक इच्छा शक्ति के चलते सरकार ने उन पर कोई कार्यवाई न कर इनके आपराधिक मनोबल को ही बढ़ाया है। ऐसे में बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ की 6ठीं बरसी पर ‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति और खुफिया-सुरक्षा एजेंसियां’ की भूमिका पर गंभीर बातचीत और देश द्रोही ताकतों के खिलाफ मजबूत जनांदोलन के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने इंसाफ पसन्द अवाम से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों।
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