जुगनू शारदेय

कुछ तो बात है अपने देश के बाजार में । बड़ा डराया जाता है कि अपने बाजार के खिलाड़ी , बाहरी विदेशी खिलाड़ी से पीट जाएंगे । लेकिन हमारे देश के बाजार पर कब्जा जमाने वाले लोग बड़ी ऊंची चीज हैं । पता नहीं अंग्रेजी के मार्केटिंग को हिंदी में एक शब्द में क्या कहेंगे । विपणन तो अनुवाद करने वाले को भी समझ में नहीं आता होगा । मालबेचवा कह सकते हैं । यह मालबेचवा बड़ी ऊंची चीज होते हैं । माल बनाने वाले से भी ज्यादा बड़ी चीज होते हैं । यह मालबेचवा अपने आयडिया दे माल बिकवाता है – खरीदवाता है ।

आयडिया की बात पर यह आयडिया आया कि इसके मालबेचवा खेल में मत फंसना । अभी यह बात ही बात में नहीं हर बात पर बता रहा है कि गेट आयडिया । यह आयडिया तो बहेलिया आएगा , दाना डालेगा – मगर आप मत फंसना । हम फंसे हुए हैं । यार दोस्त कहते हैं कि तुम्हारा मोबाइल मिलता ही नहीं । बात ही बात में सरकार ने तय कर दिया है कि नंबर वही रहेगा , पर मोबाइल का सर्विस प्रोवाइडर बदल सकता है । इसी का फायदा उठा रहा है आयडिया ।

लेकिन मालबेचवा में सबसे समझदार साबित हुए हैं महाशय दी हट्टी के बुढ़उ । उनका ही माल मसाला , वही मॉडल भी हैं । हर जगह मौजूद रहते हैं माल मसाला बेचने के लिए । इंडिया भी बना देते हैं ठेठ भारतीय मसाला को , तभी तो महाशय द हट्टी – एम डी एच हो जाता