नई दिल्ली,19 जून। करावल नगर इलाके में बादाम तोड़ने वाले मज़दूरों ने अपनी श्रम-क़ानूनों माँगों को लेकर करावल नगर मज़दूर यूनियन के बैनर तले हड़ताल की घोषणा कर दी है। इस क्षेत्र के बादाम उद्योग में लगे सैकड़ों मज़दूरों के हड़ताल पर चले जाने से यहाँ से देश-विदेश में बादाम का निर्यात प्रभावित हो सकता है।

केएमयू के सचिव नवीन ने कहा कि 1970 के ठेका मज़दूरों क़ानून के तहत जो बुनियादी अधिकार दिये थे उनका यहाँ कोई पालन नहीं होता है। उन्होंने बताया कि अपनी इन श्रम-क़ानून माँगों को लेकर यह मज़दूर बादाम मालिकों और इस क्षेत्र के विधायक से मिले थे। लेकिन कोई सुनवाई न होने पर मजबूर होकर ये मज़दूर अनिश्चितकालिन हड़ताल पर जा रहे हैं।

ज्ञात हो कि करावल नगर में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से आयातित बादाम को तोड़ने के काम लगभग एक हज़ार से ज्यादा मज़दूर लगे हुये हैं।

केएमयू के सदस्य राहुल ने कहा कि बेहिसाब महँगाई में न्यूनतम मज़दूरी भी न मिलने से मज़दूरों के परिवार के सामने दाल-रोटी की चिन्ता बढ़ गयी है। उन्होंने बताया कि मशीन से बादाम टूटने के बाद बादाम की छँटाई के लिये मज़दूरों को प्रति किलो पर मात्र एक से डेढ़ रुपये ही दिया जाता है। हमारी माँग है कि इसे प्रति किलो तीन रुपये किया जाये। साथ ही वेतन पर काम करने वाले मज़दूरों को दिल्ली सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मज़दूरी दी जाये। बुधवार से घोषित हुयी हड़ताल के पहले दिन सभी बादाम मज़दूरों ने हाथों में अपनी बुनियादी माँगों की लिखित तख्तियों के साथ पूरे इलाके में रैली निकाली और फिर इस इलाके के मंगल बाजार चौक पर इकठ्टा हो एक सभा कर इस जगह को हड़ताल का धरना स्थल घोषित किया।