बिजली संकट से निपटने के लिए बिजली इंजीनियरों ने दिए सुझाव

केंद्र व् राज्य के अधिकारियों की तत्काल बैठक ज़रूरी
सियासी बयानबाज़ी से नहीं होगा समाधान
लखनऊ। उ प्र में चल रहे गंभीर बिजली संकट के समाधान हेतु बिजली इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री को सुझाव देते हुए कहा है कि फौरी तौर पर संकट के समाधान हेतु केंद्र व राज्य सरकार के बिजली से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की तत्काल बैठक बुलाई जाये और व्यर्थ की बयानबाज़ी बंद हो क्योंकि बिजली संकट का समाधान सियासी वक्तव्यों के बजाय तकनीकी कदम उठाने से होगा अन्यथा आने वाले महीनों में प्रदेश की जनता को और गंभीर बिजली संकट झेलना होगा ।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, उ. प्र. विद्युत अभियंता संघ के अध्यक्ष आर के सिंह एवं महासचिव डी सी दीक्षित ने आज यहाँ जारी बयान में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आश्वस्त किया कि बिजली निगमों में योग्य बिजली अभियंताओं की कोई कमी नहीं है और बिजली इंजीनियर व कर्मचारी बिजली संकट के समाधान हेतु कृत संकल्प हैं किन्तु इस मामले में राजनीति के बजाय ठोस तकनीकी कदम उठाने की ज़रुरत है जिसके लिए राज्य सरकार को अविलम्ब पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा की इस हेतु केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और उ प्र पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों की बैठक बुलाई जाये जिसमें बिजली संकट से जूझ रहे प्रदेश को रहत देने के उपाय तय किये जाएँ।
बिजली इंजीनियरों ने समस्या के तात्कालिक समाधान हेतु पांच कदम उठाने का सुझाव दिया है। पहला- उत्तरी क्षेत्र में केंद्रीय कोटे की 15 प्रतिशत बिजली केंद्र सरकार के विवेकाधीन रहती है, उ प्र के संकट को देखते हुए इसमें से 400 मेगा वाट तक अतिरिक्त बिजली केंद्र, उ. प्र. को दे सकता है जिसके लिए मुख्यमंत्री को पहल करना चाहिए। दूसरा- केंद्रीय कोटे से दिल्ली की निजी कंपनियों को लगातार ज़रूरत से ज्यादा बिजली दी जा रही है जिसे ऊँचे दाम पर बेच कर दिल्ली की कम्पनियाँ सालाना 1000 करोड़ रु. से अधिक का मुनाफा कमा रही हैं, इसे रोका जाये और दिल्ली को दी जा रही ज़रूरत से अधिक बिजली उ. प्र. को दी जाये, इससे भी लगभग 300 मेगा वाट तक अधिक बिजली प्रदेश को मिल सकती है। तीसरा- रिलायंस जानबूझकर सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट आधी क्षमता पर चला रहा है क्योंकि इससे मिलने वाली बिजली का मूल्य मात्र रु 1.10 प्रति यूनिट है जबकि रिलायंस रोज़ा प्लांट को पूरी क्षमता पर चला कर उ. प्र. को रु 6.06 प्रति यूनिट में बिजली देने में अधिक रूचि रखता है। केंद्र व राज्य सरकार सासन प्लांट पूरी क्षमता पर चलाने हेतु रिलायंस पर दबाव डालें अन्यथा दंड वसूला जाये। उल्लेखनीय है कि चालू वित्तीय वर्ष में सासन प्लांट से 01अप्रैल से 31मई तक 2503 मियू की जगह मात्र 1802 मियू उत्पादन हुआ है जो शिड्यूल से 700 मियू काम है। सासन में उ प्र का 12.5 प्रतिशत कोटा देखते हुए इस प्रकार उ प्र को गत दो माह में 86.2 मियू काम बिजली मिली है। ध्यान रहे सासन से उ प्र को प्रतिदिन लगभग 200 मेगावाट बिजली मिलनी चाहिए जिसे सुनिश्चित किया जाये। चौथा-अनपरा सी में लैंको जानबूझकर कम बिजली उत्पादन कर रहा है और नियमानुसार कोयला आयात नहीं कर रहा है, इस मामले में सख्त कार्यवाही की जाये तो 600 मेगा वाट और बिजली तुरंत मिल सकती है। सासन में रिलायंस और अनपारा सी में लैंको बिडिंग की दरों को बढ़वाने के लिए ब्लैकमेल कर रहे हैं जिसे सख्ती से डील किया जाये। पांचवां- विद्युत उत्पादन निगम के बिजली घरों को सही मात्रा में सही गुणवत्ता का कोयला दिलाने हेतु केंद्र व राज्य बेहतर समन्वय स्थापित करें। इसके अलावा बिजली की फ़िज़ूलखर्ची रोकने के लिए राज्य सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए। बिजली इंजीनियरों ने कहा कि इन कदमों से ही बिजली की उपलब्धता में 1500-2000 मेगा वाट की वृद्धि हो जाएगी और मौज़ूदा हालात में कुछ राहत मिल सकेगी।
बिजली अभियंताओं ने प्रदेश में हर वर्ष गहराते बिजली संकट के लिए बिजली उत्पादन के मामले में निजी घरानों पर अति निर्भरता की गलत ऊर्जा नीति और राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी को जिम्मेदार ठहराते हुए मांग की कि निजी घरानों के साथ किये गए सभी एमओयू रद्द किये जाएँ,12 वीं पंचवर्षीय योजना में कम से कम 70 प्रतिशत परियोजनाएं सरकारी क्षेत्र में दी जाएँ जिससे वे समय से पूरी हो सकें और सस्ती बिजली मिल सके। उन्होंने कहा कि गत वर्ष की तुलना में इस साल बिजली की मांग 250 मियू से बढ़कर 282 मियू हो गयी है जो 300 मियू तक जा सकती है जबकि वर्ष 2013-14 में प्रदेश में एक यूनिट की भी उत्पादन क्षमता में वृद्धि नहीं की गयी, बिजली संकट का यही मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि जब तक मांग के अनुरूप बिजली उत्पादन बढ़ाने के कदम नहीं उठाये जायेंगे तब तक हर साल बिजली संकट गहराता जायेगा और सियासी बयानबाज़ी होती रहेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ऊर्जा विशेषज्ञों की समिति बनाये जिसमें बिजली कर्मचारी व अभियंता संघ को प्रतिनिधित्व दिया जाये, जो बिजली संकट से उबरने के तात्कालिक और दीर्घकालिक कदम बताये जिस पर राजनीति से ऊपर उठकर अमल किया जाये तो प्रदेश के बिजली इंजीनियरों एवं कर्मचारियों के सहयोग से उ प्र को भी बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना कोई कठिन काम नहीं है।