बुध महाराज देंगे दर्शन
बुध महाराज देंगे दर्शन
बुध को देखने के लिए आप शुक्र का सहारा लें
वड़ोदरा। शुक्र और बुध, पृथ्वी और सूर्य के बीच में घूमने वाले ग्रह हैं, इसीलिये ये दोनों आंतरिक ग्रहों को पूरी रात्रि में नहीं देखा जा सकता है और जब वे सूर्य से अति दूर के कोणीय अंतर पर होते हैं तभी उनको देखना अच्छा रहता है।
इसमें भी बुध जो कि हर दो माह में अपनी दिशा बदलता रहता है, मतलब कि एक बार पूर्व में तो दूसरी बार पश्चिम में दिखाई देता है उसे तो जब वह एलोन्गासन पर हो तभी देख सकते हैं।
कभी ही दिखता है बुध :
जिसका कोई भी चंद्र नहीं है, कोई प्राकृतिक वातावरण नहीं है, जिसके तापमान में -१८० से +४३० तक का भयंकर तफावत होता है ऐसे बुध को प्रसिद्ध खगोलशास्त्री कोपर्निकस अपने पूरे जीवन काल में नहीं देख पाये थे। ऐसे बुध महाराज अब आगामी पूरे 6-7 दिन तक पश्चिमी आकाश में दिखाई देंगे।
2015 का सबसे श्रेष्ठ बुध :
इस बार 6 और 7 मई को बुध इस साल के सबसे दूर यांनी कि 21 डिग्री के कोणीय अन्तर पर होंगे, इसीलिये उसी दिन शाम को सूर्यास्त के बाद जहां सूर्यनारायण अस्त हुये थे लगभग उसी जगह पर शाम 7:40 से 8:20 मिनिट तक आसानी से देखा जा सकेगा। उस उस समय चंद्रमा न होने के कारण उसकी चाँदनी बाधा नहीं डालेगी तो उसे आसानी से देखा जा साकेगा। उस दिन वृषभ राशि में होंगे। बुध का पृथ्वी से अंतर 12:40 करोड़ कि.मी. और सूर्य से 6.4 करोड़ कि.मी.होगा. तेजस्विता अंक 0.5 होगा यांनी कि काफी तेजस्वी दिखाई देगा.
कैसे और कहां देखें :
सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में बुध को देखने के लिए आप शुक्र का सहारा लें, शुक्र से ठीक हमारी दाईं और नीचे बुध दिखाई देगा। इन्वर्टेड विसन या छोटे दूरबीन का सहारा लेंगे तो बुध साफ़ दिखाई देगा। शुक्र के ठीक ऊपर गुरु दिखाई देगा जब कि बुध के नीचे मंगल होगा, मगर वो क्षितिज पर होने के कारण दिखाई नहीं देगा।
तो मित्रो अपने कैलेंडर में मार्क कीजिए और अपने बच्चों के साथ उस दिन कुदरत का यह अद्भुत नजारा देखिए। आकाश दर्शन हमे बनाता विश्वमानव, दूर करता है हमारा तनाव, देता है हमे आनंद, परम शांती और ऐक्य का भाव।
दिव्यदर्शन द पुरोहित


