बूढ़े हो चुके इस बाघ का नाम है चंचल सिंह, जिनके पेशाब से लंका से लेकर काशी के हर कोने तक दिया जलता था
बूढ़े हो चुके इस बाघ का नाम है चंचल सिंह, जिनके पेशाब से लंका से लेकर काशी के हर कोने तक दिया जलता था
दंतचियरे दामाद जी गिरफ्तार हो जाते, तो जमीन-आसमान एक हो जाता !
बदलापुर ! इस जगह का जैसा नाम है, वैसा काम भी.
बदलापुर पुलिस ने एक बाघ पकड़ लिया है, जिसकी तलाश 33 साल से हो रही थी. बूढ़े हो चुके इस बाघ का नाम है चंचल सिंह.
वही "चंचल", बीएचयू छात्रसंघ के बहुचर्चित अध्यक्ष, जिनके पेशाब से लंका से लेकर काशी के हर कोने तक दिया जलता था. किशोरावस्था में उनके बारे में दन्त कथाएं अक्सर सुनते थे.
मिलना कभी नहीं हुआ, मगर एक ही पेज पर कई बार साथ-साथ अख़बारों में छपे. मुझसे उम्र में कई दशक बड़े होंगे, मन में उनके प्रति सम्मान शब्दों से खेलने के कारण हुआ है.
क़िस्सा कोताह यह है कि बदलापुर में कोई आईएएस टीटी गौड़ हुआ करता था, उसके काम में बाधा पहुंचाने का केस है. यह उत्तरप्रदेश शासन की निगाह में रासुका से भी बड़ा मामला लगता है.
मुझे अफ़सोस और हैरानी कांग्रेस के रवैये को लेकर है. वही कांग्रेस जिसके लिए चंचल जी कलम से लेकर कम्प्यूटर तक के "की-बोर्ड" घिसते रहे, उसके नेता इस सरकारी गुंडई के विरुद्ध सड़क पर नहीं हैं. कमाल की लीडरशिप है कांग्रेस की. नेहरू फ़ैमिली के दंतचियरे दामाद जी गिरफ्तार हो जाते तो जमीन-आसमान एक हो जाता !
सुना कि अदालत ने ज़मानत दे दी, और पुलिस को फटकार लगायी है !


