मसीहुद्दीन संजरी

बेगुनाह मुसलमानों को आतंकवाद के नाम पर फंसाने के कई मामले बेनकाब हो चुके हैं, लेकिन किसी ने यह सोचा भी नहीं होगा कि उत्तर प्रदेश में यह फर्जीवाड़ा इतना विकराल रूप ले चुका है कि किसी हिंदू को पाकिस्तानी मुसलमान भी बनाकर पेश किया जा सकता है।

आतंकवाद के नाम पर फर्जी गिरफ्तारियों का साल 2007 सन् 2007 को आतंकवाद के नाम पर फर्जी गिरफ्तारियों का साल कहा जाए तो गलत न होगा। उसी साल आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार चौदह बेकसूर मुसलमानों को अदालतों द्वारा रिहाई मिल चुकी है।

लेकिन अब एक विचित्र मामला सामने आया है जिसमें पाकिस्तान के आतंकियों के नाम पर गिरफ्तार किए गए तीन मुसलमानों में से एक आबिद उर्फ फत्ते के बारे में मेरठ निवासी पवन कुमार और उनकी मां महेश देवी ने दावा किया है कि वह आबिद नहीं उनका भाई/ बेटा प्रवीण कुमार है।

परिवार ने इस मामले में रिहाई मंच से सम्पर्क किया और आज रिहाई मंच के नेताओं के साथ एक प्रेस कांफ्रेन्स के माध्यम उत्तर प्रदेश सरकार से प्रवीण कुमार से मिलाए जाने और उसका डीएनए टेस्ट कराए जाने की मांग की है।

हालांकि जिस प्रकार समाजवादी सरकार ने आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को रिहा करने का अपना चुनावी वादा नहीं निभाया, निमेष आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने के बावजूद कारवार्इ रिपोर्ट न लाकर धोखा किया, खालिद मुजाहिद की पुलिस हिरासत में हत्या के मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों को बचाने का काम किया, उससे यह नहीं लगता कि वह इस मामले में पीड़ित परिवार के साथ न्याय कर पाएगी।

फिर भी रिहाई मंच ने इस मामले से परदा उठा कर सरकार को जनता की अदालत में घसीटा है।

बेगुनाह जेल में, राजा भैया जैसे लोग कैबिनेट में और यादव सिंह जैसे भ्रष्टाचार के आरोपियों की पैरवी सुप्रीम कोर्ट तक। अखिलेश बाबू केवल दावा करने से कोई मिस्टर क्लीन नहीं बन जाता।