झारखंड : बोल्शेविक क्रांति के सौवें वर्षगांठ को मनाने से रोकने के लिए कई हथकंडे अपना रहा है प्रशासन

  • विशद कुमार

देश भर के लगभग सभी वामपंथी संगठन 7 नवंबर 1917 को रूस में हुई ऐतिहासिक परिवर्तन बोल्शेविक क्रांति के सौवें वर्षगांठ को साम्यवादी स्थापना के प्रतीकात्मक रूप से पूरे देश में मना रहे हैं। दिल्ली में न्यू सोशलिस्ट इनीशिएटिव ने एक आयोजन किया, तो उससे पहले गुड़गांव में एक आयोजन हुआ। हाल ही में तीन दिनों का एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नेपाल के काठमांडो में संपन्न हुआ है जिसमें भारत, चीन और नेपाल के तमाम बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया।

कहने का तात्पर्य यह है कि देश के किसी भी हिस्से में उक्त कार्यक्रमों से किसी भी शासनतंत्र को कोई परेशानी नहीं हुई, मगर उक्त कार्यक्रम से झारखंड की रघुवर सरकार की पीड़ा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 13 संगठनों द्वारा "महान बोल्शेविक क्रान्ति की शताब्दी समारोह समिति" झारखंड, का गठन करके जब राज्य के विभिन्न हिस्सों में बोल्शेविक क्रांति के सौवें वर्षगांठ को मनाने तैयारी की गई तो एक तो कार्यक्रम की प्रशासनिक अनुमति नहीं दी गई और दूसरी कार्यक्रम को विफल करने की तमाम कोशिशें की गई।

समारोह समिति द्वारा 7 नवंबर को कार्यक्रम की शुरूआत गिरिडीह से की गई जिसमें 10 हजार के करीब लोग भाग लिये। कार्यक्रम के पूर्व एक रैली निकाली गई जो लगभग 7 कि0मी0 की दूरी तय करते हुए अजीडीह के चक्रव्यूह मैदान से वापस कार्यक्रम स्थल तक आई।

सबकुछ काफी शान्तिपूर्ण रहा और कार्यक्रम के बाद सभी लोग शान्ति के साथ अपने अपने घर वापस हो गए।

एक बात उल्लेखनीय रही कि कार्यक्रम की समाप्ति तक जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और इस कोशिश में लगा रहा कि कार्यक्रम अव्यवस्थित हो जाय, मगर आयोजकों की सावधान मुस्तैदी ने प्रशासन की हर कोशिश पर पानी फेर दिया।

'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' वाली कहावत को चरितार्थ करते हुये जिला प्रशासन ने अंतत: दूसरे दिन 8 नवंबर को 800 अज्ञात एवं 12 नामजद लोगों के खिलाफ भदवि की धारा 147, 148, 149, 341, 342, 323, 504, 506, 353 के तहत प्राथमिकी दर्ज किया।

बावजूद आयोजन कर्ताओं ने प्रायोजित कार्यक्रम को 12 नवम्बर नरकी, 13 नवम्बर हरलाडीह पश्चिमी, 15 नवम्बर कतरास एवं 17 नवम्बर अहिल्यापुर में सफलता पूर्वक मनाया। मगर 18 नवम्बर बोकारो थर्मल में प्रशासन ने आयोजित कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ धारा 107 लगा कर कार्यक्रम पर बैन लगा दिया। फिर भी आयोजनकर्ता हजारों की संख्या में कार्यक्रम स्थल भगत सिंह चौक पर पहुंच कर कार्यक्रम की शुरूआत की, मौके पर पुलिस ने सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया और थाने ले जाकर बिठा दिया। दोपहर को जब गिरफ्तार लोगों ने भोजन की मांग की तब थानेदार का दिमाग घूम गया और सभी को छोड़ दिया।

बोल्शेविक क्रांति जिंदाबाद और पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए सारे लोग मजदूर संगठन समिति के बोकारो थर्मल शाखा कार्यालय पर आकर बोल्शेविक क्रांति समारोह कार्यक्रम को मनाया एवं बोल्शेविक क्रांति की प्रासंगिकता को उपस्थित जन समूह के समक्ष रखा। अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये।

मसंस के केन्द्रीय महासचिव बच्चा सिंह एवं दिल्ली से आए भोर पत्रिका के संपादक एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंजनी कुमार ने प्रशासन के इस रवैए की आलोचना की। अवसर पर अपनी आंख गंवा चुके बिन्दु जी ने क्रांतिकारी गीत गाया।