भागड़ा पीजितों के धर्मान्तर के लिए जिम्मेवार कौन!
एच. एल. दुजाध
मैं सामन्यतया टीवी नहीं, सूचनाओं के लिए अंशों और सोशल मीडिया पर निर्भर रहता हूँ। इसी लिए गत 8 अगस्त को यह नहीं जान पाया कि भागड़ा के पीजितों ने इस्लाम कबूल करने का क्या निर्णय लिया है।
इसकी जानकारी 9 अगस्त की सुबह 7 बजे तब हुई जब मैंने फेसबुक खोला। खोलते ही मेरी नजर फॉरवर्ड प्रेस के संपादक सलाखकार व भागड़ा की निर्वह्यायें पुष्टि के अपने साथी संपादक प्रमोद रंजन के हेरतंगेज़ पोस्ट पर पड़ी, जो 9 अगस्त की सुबह 1.49 पर पोस्ट की गई थी। उनमें लिखा था-‘हरियाणा के भागड़ा गांव के लगभग 100 दलित और ओबीसी परिवारों ने आखिरकार इस्लाम कबूल कर लिया। यह सारा घटनाक्रम आज (8 अगस्त) दिल्ली में हुआ। धर्मपरिवर्तन के बाद उन्होंने जंतर मंतर पर नमाज भी पढ़ी। यह तस्वीरे जंतर मंतर की है। उनके शोशण पर तो सब चुप थे, अब देखिएगा कि धर्म की राजनैतिक इस पर कैसी प्रतिक्रिया देती है।’
यह पोस्ट पढ़कर मैं स्तब्ध रह गया। कारण, भागड़ा पीजितों के अभियायन में सहीयोग के लिए प्रमोद रंजन और जितेन्द्र यादव के साथ मिलकर ‘भागड़ा की निर्वह्यायें: दलित उत्पीड़न के अनवैरत सिलसिले का दस्तावेज’ पुस्तक तैयार करने के क्रम में मैं तन-मन से उनके साथ जुड़ा हुआ था।