भाकपा माले देगी तीसरा विकल्प दीपांकर भट्टाचार्य
भाकपा माले देगी तीसरा विकल्प दीपांकर भट्टाचार्य
पटना, 9 नवंबर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) सत्ता परिवर्तन के लिए जनांदोलन के बूते 'तीसरा विकल्प' देगी। ऐतिहासिक गांधी मैदान में शुक्रवार को भाकपा (माले) की परिवर्तन रैली में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने यह ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य और केन्द्र सरकार के जनविरोधी नीतियों एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने का आव्हान करते हुये यूपीए-एनडीए के विरुद्ध वामपंथी, साम्यवादी और लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होने की अपील करते हुये जनविरोधी सरकारों को सत्ता से उखाड़ फेंकने का आव्हान किया।
बीती 4 नवंबर को पटना में नीतीश कुमार की और दिल्ली में हुई कांग्रेस की रैलियों से यह बिल्कुल अलग चरित्र की रैली थी। नीतीश कुमार की रैली की तैयारी में जहाँ प्रशासन सारा कामकाज छोड़ कर लगा था और बाहुबली-माफिया भीड़ जुटाने के लिए ताकत लगाये हुए थे, वहीँ कोंग्रेस की रैली में अमेरिकापरस्ती को देश के लिए हितकर ठहराया जा रहा था, एफडीआई के पक्ष में तर्क दिया जा रहा था, वहीँ भाकपा-माले की रैली इन दोनों सरकारों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ थी। भ्रष्टाचार, अपराध, लूट और पूँजी की ताकत पर चलने वाली राजनीति और सत्ताधारियों के घमंड का जवाब थी यह रैली।
पार्टी के अनुसार यह गरीब मेहनतकश, ईमानदार लोगों की रैली थी जिसके जरिये लूट की पूँजी पर इतराती इस देश की राजनीतिक संस्कृति को जनता ने करारा जवाब दिया और अपनी ताकत का इजहार किया।
रैली में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया
“रैली प्राकृतिक संसाधनों की लूट, भ्रष्टाचार, महंगाई, रिटेल में विदेशी निवेश और यूपीए सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ चले 'हरे प्रतिरोध आंदोलन' को तेज करने का संकल्प लेती है। यूपीए व एनडीए की जन विरोधी नीति के खिलाफ 20-21 फरवरी 2013 को ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करती है। रैली, अपराधी-पुलिस गठजोड़ द्वारा भैयाराम यादव-छोटू कुशवाहा हत्याकांड तथा फारबिसगंज और औरंगाबाद पुलिस गोलीकांड की सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए मधुबनी व परैया पुलिस फायरिंग को सरकार की तानाशाही बताती है। रैली, लोकतंत्र की हिफाजत और नए बिहार के निर्माण के लिए परिवर्तन की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लेती है।
प्रस्ताव में कहा गया, “दलित उत्पीड़न की घटनाएं पुराने दौर की याद कराती हैं। रणवीर सेना के बरमेश्वर सिंह हत्याकांड के बाद हमले के शिकार दलित छात्रों को अभी तक न्याय, उनके छात्रावासों के पुनर्वास की गारंटी नहीं हो सकी है। रैली सरकार के विश्वासघात के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का संकल्प लेती है। रैली, मिथिलांचल-सीमांचल के इलाके में भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति की प्रयोगशाला बनाने की कोशिशों और मुस्लिम नौजवानों को आतंकी घोषित कर प्रताड़ित करने की घटनाओं का विरोध करते हुए समान अधिकार और सुरक्षा-सम्मान की गारंटी की मांग करती है।“
प्रस्ताव के अनुसार महिलाओं के प्रति अपराध बेतहाशा बढ़ रहे हैं। अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है। लालू-राबड़ी शासन की याद ताजा हुई है। .. प्रतिरोध आंदोलन पर पुलिस दमन चल रहा है। रैली महिलाओं के मान-सम्मान और बराबरी के अधिकार के लिए चल रहे उनके आंदोलनों का पुरजोर समर्थन करते हुए उसे जारी रखने की अपील करती है।
प्रस्ताव में छात्रों-शिक्षकों के आंदोलनों के प्रति सरकार के रवैये की भर्त्सना करते हुए नियोजित शिक्षकों के समान काम के लिए समान वेतन व स्थायी नियोजन की मांग का समर्थन किया गया तथा गरीब विरोधी, किसान विरोधी नीतियों को रद्द कर मुकम्मल भूमि सुधार, कृषि आधारित नए कल-कारखाने की स्थापना और सिंचाई व्यवस्था का माँग की गई।


