भामक का भ्रमपन
भामक का भ्रमपन
जुगनू शारदेय
बहुत दिनों के बाद बोरियत मिटी । वह तो बोलने ही नहीं देते थे । हम बोले तो उनका राष्ट्रवाद उनके उगालदान से उछल कर मेरे चेहरे पर यूपीए 2 के भ्रष्टाचारी फेविकोल की तरह चिपक जाता था । ऐसा लगता था कि राष्ट्र का सत्यमेव जयते उनका ही स्वंयसेवक है । हमें कुछ मौसमी बीमारी ने घेरा तो शुभचिंतकों ने कहा कि भई, यह जादू टोना भी करवाते हैं । हमने कहा कि जादू टोना मन्नु पर करवाते होंगे कि हर बात पर वह भ्रामक हुए जाते हैं । पर यहां तो बात ही कुछ और निकली । पुराना स्वंयसेवक मित्र इतना रो चुका था कि लगा कि संसद में आंसू की बाढ़ आने वाली है । पता नहीं त्रिपुर सुंदरी और कल्हण पुत्र इस पर क्या कहेंगे । हमारा पुराना स्वंयसेवक मित्र जाते जाते नाक की गंदगी और जुबान का सच बोल गया कि पिछवाड़े बुड्ढा खांसता ।
हम जब कहते थे तो कहते थे कि क्या कहते हो । हमें कहां पता था कि बुढ़ऊ सच भी बोलते हैं । ऐसा वैसा सच नहीं कि लगे कि जिन्ना दारू नहीं पीते थे ।ऐसा सच कि लगे कि पूरा का पूरा झूठिस्तान फैला रखा है । इसमें भी खेल बड़ा यह है कि इस झूठिस्तान का फायदा उसे पहुंचता है जिसने देश को घूसीस्तान बना रखा है । अब आपको तो पता ही है कि घूस हमारी एक सामाजिक परंपरा है । निर्वहन कुमार चाहें लोगों को बिहार निकाला दे दें – हम चौसा पार , तिलैया पार यह काम कर लेंगे ।
हमारे बिहार – झारखंड में झूठिस्तान का आधा आधा राजपाट है । इस पर अभी तक शोध नहीं हुआ है कि झूठिस्तान का घूसीस्तान का आपसी संबंध क्या है । या जहां झूठ होगा , वहां घूस वुस आ ही जाएंगे । अब भाषण बंद – पिछवाड़े में बुड्ढे को खांसने में तकलीफ हो रही है । कफ जब ज्यादा जमा हो गया था तो लगा बुढ़ऊ को जैसे कफ जमा होता रहता है शरीर मे , वैसे ही काला धन जमा ही होता रहता है स्वीस बैंक में । जब तक वहां यह जमा रहेगा बुढ़ऊ का कफ बढ़ता रहेगा । बना दी स्वंयसेवकों का दस्ता । एक से एक नामी – एस गुरूमूर्ति ।
स्वदेशी जागरण मंच का आदमी ही तो जांच करेगा विदेसी बैंक में जमा माल की । वैसे यह भी अपने को ईकॉनॉमिस्ट कहते हैं । खैर पत्रकार तो कोई भी हो सकता है – जब हम हो सकते हैं तो कोई भी हो सकता है । इसके बाद सूरमा हैं अजीत डोवाल – इनका पुराना पेशा ही बता देगा कि क्या ऊंची चीज हैं । इंटिलेंजेंस ब्यूरो के निदेशक रह चुके हैं । आर विद्यानाथन प्रोफेसर भी हैं और कॉलमिस्ट भी हैं । कॉलमिस्ट कितने बेमतलबी होते हैं – यह आप मुझे पढ़ पढ़ कर झेल चुके हैं । महेश जेठमालानी वकील हैं । अब जिनका पेशा ही झूठ – सच है , उनके बारे में क्या कहें ।
ऐसे महान लोगों के टॉस्क फोर्स को पहले से ही पता था कि किसका पैसा स्वीस बैंक में जमा है । इनका दावा है कि रकम 25 लाख करोड़ रुपया है । बाकी लोगों का नाम ये बता नहीं रहे हैं , पर यह दावा कर रहे हैं कि राजीव गांधी – सोनिया गांधी का खाता खुला है । लेकिन साबित हुआ कि यह बात गलत है – वह भी तब जब सोनिया गांधी ने चिट्ठी लिखी तो । इस बात पर माफी या खेद या हमसे भूल हुई की भाषा में लालकृष्ण आडवाणी ने सलाह दी कि बात जब उछल रही थी तो लिखना चाहिए था न । चलो पहली बार हमारे बुढ़ऊ स्वयसेवक ने माना तो सही कि गंदगी फैलाते हैं । इस ही कहते हैं भामक का भ्रमपन


