जगदीश्वर चतुर्वेदी

भारत में वामदलों और खासकर माकपा और भाकपा कभी बहुत बड़ी राजनीतिक ताकत संख्या के लिहाज से ताकतवर नहीं रहे लेकिन संसद के अंदर और बाहर आम जनता की तकलीफों और जनहित के सवालों पर कम्युनिस्ट पार्टियों की सरकारी नीतियों को प्रभावित करने में बहुत बड़ी भूमिका रही है और वे मज़दूरों किसानों के हितों के सबसे बड़ी संरक्षक रही हैं।

कम्युनिस्टों ने कम खर्चीले मुख्यमंत्री और मंत्री बनाए हैं और कम खर्च में लोकतंत्र में शानदार ढंग से काम किया है। इन दिनों मोदी और राहुल की तड़क-भड़क देखें और याद करें 1957 को जब पहली बार केरल में कम्युनिस्ट नेता ईएमएस नम्बूदिरीपाद केरल के पहले मुख्यमंत्री बने थे। वे साइकिल से अपने दफ्तर जाते थे। उनके साइकिल के कैरियर में पीछे टाइपराइटर बंधा रहता था और वे किराए के मकान में रहते थे। उस समय सादगी की प्रतिमूर्ति राजेन्द्र बाबू के लिये कारों का काफिला ख़रीदा गया था। ईएमएस जैसा आदर्श आज तक एक भी मुख्यमंत्री या नेता क़ायम नहीं कर पाया। उन्होंने अपनी समस्त संपत्ति कम्युनिस्ट पार्टी को दान में दे दी और पार्टी जो देती थी उसमें ही गुज़ारा करते थे। वे आधुनिक केरल के महान निर्माता बने। सारी दुनिया में लोकतांत्रिक ढंग से जनता के वोट से चुने गए पहले कम्युनिस्ट नेता बने।

कहने का मतलब है कि सारी दुनिया के कम्युनिस्टों को लोकतंत्र से प्यार करना भारत के कम्युनिस्टों ने सिखाया।