भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति ने ट्रम्प के ट्रम्प पर निराशा व्यक्त की
भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति ने ट्रम्प के ट्रम्प पर निराशा व्यक्त की
नई दिल्ली,18 जनवरी। भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति के चेयरमैन प्रो. भीमसिंह की अध्यक्षता में एक आपात बैठक जंतर मंतर, नई दिल्ली में आयोजित की गयी। नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य प्रो. भीमसिंह की 1968 में फिलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन के चीफ यासिर अराफात से जॉर्डन में जोर्डन नदी के किनारे ईस्टर्न बैंक में मिले थे, तब से ही वे फिलस्तीनी मामलों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने मोटरसाइकिल से शांति मिशन के तहत पूरी दुनिया का दौरा किया था।
प्रो. भीमसिंह फिलस्तीनी आंदोलन से 1967 से और श्री यासिर अराफात से उनके निधन तक जुड़े रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की मोदी सरकार अरबों और फिलस्तीनी मामलों के प्रति निष्पक्ष नहीं रही। उन्होंने कहा कि भारत की वर्तमान अगुवाई फिलस्तीन की वास्तविक स्थिति को समझने में असमर्थ है और उसे महात्मा गांधी के इन शब्दों को याद रखना चाहिए कि फिलस्तीन फिलस्तीनियों का है, इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रांस फ्रांसीसियों का।
प्रो. भीमसिंह ने 70 देशों की इस प्रस्ताव का स्वागत किया है, जिसमें विश्व में शांति बनाए रखने के लिए फिलस्तीन में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के कार्यान्वयन और फिलस्तीन की स्थापना का समर्थन किया गया है।
प्रो. भीमसिंह ने ऐलान किया कि भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के समर्थन में इस वर्ष अप्रैल में नई दिल्ली में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन केरगी। उन्होंने दुनिया को अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के जियोवादी आंदोलन के समर्थन में उकसाने वाले नारों से दूर रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यही जियोवादी आंदोलन फिलस्तीन में 1947 से होने वाली मौतों, विनाश और अराजकता के लिए जिम्मेदार है।


