भारत में बगैर किसी रोक-टोक या निगरानी के चल रहे हैं नाभिकीय उद्योग
भारत में बगैर किसी रोक-टोक या निगरानी के चल रहे हैं नाभिकीय उद्योग
काली सूची में डाली गयी कंपनियों के बारे में ए.ई.आर.बी अनजान
भ्रष्टाचार और अनाचार के साक्ष्य के बावजूद ए.ई आर.बी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
नई दिल्ली/चेन्नई/ मुबई, 10 दिसंबर। एटॉमिक एनर्जी रेगुलटरी बोर्ड (ए.ई.आर.बी) ने अपने स्थापना काल से आज तक किसी भी नाभिकीय संयंत्रों के आपूर्तिकर्ता या निर्माता को काली सूची में नहीं डाला है। ‘सूचना के अधिकार’ के तहत ‘ग्रीनपीस’ द्वारा मांगी गयी जानकारी से ये खुलासा हुआ। पूरे भारत में नाभिकीय बिजली घरों में हुए कई हादसों व दुर्घटनाओं के बावजूद ऐसा हुआ। सूचना के अधिकार के तहत 21 अक्टुबर, 2014 को आवेदन दिया गया जिसका जवाब एन.पी.सी.आई. एल से 25 नवंबर, 2014 को प्राप्त हुआ।
ग्रीनपीस के उर्जा अभियानकर्ता होज़ेफा मर्चेंट ने बतया ‘‘ एटॉमिक एनर्जी रेगुलटरी बोर्ड (ए.ई.आर.बी) से हमने आर.टी.आई के तहत जानकारी मांगी, उन लोगों ने इसे एन.पी.सी.आई.एल और आणविक उर्जा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी ) को भी अग्रसारित कर दिया। जो आवेदन आणविक उर्जा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी ) को भेजा गया उसे एन.पी.सी.आई.एल भी अग्रसारित कर दिया गया जिसने अंततः जवाब दिया।’’ उन्होंने आगे कहा ‘‘ यह पूरी तरह स्पष्ट करता है कि नियामक संस्था अनजान है और भारत में नाभिकीय उद्योग बगैर किसी रोक-टोक या निगरानी के चल रहे हैं।’’
ग्रीनपीस द्वारा ए.ई.आर.बी को दिया गया आवेदन सूचना के अधिकार कानून-2005 की धारा 6 (3) के तहत आणविक उर्जा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी) केा स्थानांतरित कर दिया गया। सूचना के अधिकार कानून की धारा 6 (3) उन आवेदनों पर लागू होती है जहां अन्य लोक प्राधिकार के विषय में सूचना की मांग की जाती है।
होजेफा मर्चेंट ने टिप्पणी करते हुए कहा ‘‘ यह तथ्य कि, नियामक संस्था को काली सूची में डाली गयी कंपनियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, उसकी प्रभावी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि आणविक उर्जा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी ) का मुख्य काम एन.पी.सी.आई.एल द्वारा की गयी गलतियों को ढंकने और उसका समर्थन करने वाले मुखैाटे में तब्दील हो गयी है।
ग्रीनपीस ने अपने आवेदन में नाभिकीय संयंत्रों के उन आपूर्तिकर्ताओं का नाम जानना चाहा था, जिन्हें काली सूची में डाला गया है। एन.पी.सी.आई.एल ने अपने जवाब में बताया कि ‘‘ एन.पी.सी.आई.एल में उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर यह सूचना प्रदान की जाती है कि एन.पी.सी.आई.एल ने अपने स्थापना काल से आज तक किसी भी आापूर्तिकर्ता या निर्माता केा काली सूची में नहीं डाला है।’’
ए.ई.आर.बी और एन.पी.सी.आई.एल दोनों पिछले 31 वर्षों से काम कर रहे हैं। पूरे भारत भर में इसने अब तक 21 नाभिकीय बिजली घरों का निर्माण किया है। इसमें से कुछ बिजलीघरों में हास्यास्पद घटनाएं हुई हैं जैसे कैगा न्यूक्लियर प्लांट में आग लगना या इसके इसके निर्माण के दौरान गुबंद का ढह जाना। साथ ही कुडनकुलम नाभिकीय प्लांट में हुआ विस्फोट जिसमें 6 मजदूर बुरी तरह घायल हो गए थे। कुडनकुलम का नाभिकीय प्लांट के रिएक्टर नंबर-1, टर्बाइन संबंधी परेशानी की वजह से बंद कर दिया गया। इतनी घटनाओं-दुर्घटनाओं के बावजूद आज तक एक भी कंपनी को काली सूची में नहीं डाला गया है। यदि सही तरीके से इसकी जांच होती तो, कैंगा ननाभिकीय प्लांट के गुबंद के निर्माण में जिस कंपनी ने घटिया स्तर के कच्चे माल का उपयोग किया, उसे काली सूची में डाला जाता।
होज़ेफा मर्चेंट ने आगे कहा ‘‘ भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियां बिना किसी जवाबदेही के काम कर ही है परिणामस्वरूप ये दोनों भारत के लोगों व पर्यावरण के लिए खतरा बन गए हैं। जेई, अरेवा, रोसातोम और इसकी आनुषंगिक जियो-पोडोलस्क के साथ-साथ खारकोव एलेक्ट्रोकेमिकल प्लांट जैसी विदेशी कंपनियां दुनिया भर में कई प्रमुख दुर्घटनाओं व स्कैंडल में शामिल रही हैं। इसके बावजूद इन कंपनियों पर न तो कोई जाँच बिठायी गयी है और न ही इन्हें काली सूची में डाला गया है।’’
रोसातोम कंपनी की आनुषंगिक जियो-पोडोलस्क ने कुंडाकुलम नाभिकीय प्लांट (2) के लिए उपकरणों की आपूर्ति की थी। 2012 में कंपनी के प्रोक्योरमेंट डायरेक्टर को भ्रष्टाचार और धन के दुरूपयोग के मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह पाया गया था कि जियो-पोडोलस्क द्वारा नाभिकीय बिजली घर के लिए निम्न कोटि के इस्पात का इस्तेमाल महत्वपूर्ण घटकों को बनाने में किया जा रहा था और अनुपालन प्रमाण पत्र प्राप्त कर बड़ी राशि का गबन कर लिया गया।
जियो-पोडोलस्क का मामला इकलौता नहीं है। 2007 में रूस के कालिनिन नाभिकीय बिजली घर के मजदूरों ने ये पाया कि हाल में निर्मित पावर बटन को चालू एवं बंद करने वाला हिस्सा उलटा लगा दिया गया है। ठीक से जाँच में पाया गया कि खारकोव एलेक्ट्रोकेमिकल प्लांट से लाए गए उपकरणों में ढेर सारी कमियां हैं। समस्या की जड़ में जाने पर पता लगा कि खारकोव प्लांट से कुछ सामान निर्मित ही नहीं हुए थे। बल्कि एक मध्यस्थ कंपनी किसी दूसरी जगह से निम्न गुण्वत्ता वाले उपकरणों की खरीद कर नकली प्रमाणपत्र का इस्तेमाल मुनाफे केा बढ़ाने के लिए कर रही है।
होजेफा मर्चेंट ने अंत में कहा ‘‘ भ्रष्टाचार और अनाचार के सबूतों के बाद भी हिंदुस्तान के न्यूक्लियर रेगूलेटर ने आज तक किसी कंपनी को काली सूची में नहीं डाला है। यह देश के नाभिकीय नियामक व्यवस्था के अक्षम और निष्प्रभावी स्वरूप को सामने लाता है। यह कुडनकुलम नाभिकीय बिजली घर के व्यावसायीकरण में हो रही देरी को भी यह स्पष्ट करता है।’’


