लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश)। तराई मेँ घाघरा, मोहाली, सुहेली आदि नदियाँ कटान का कहर बरपा रही हैं, कच्चे पक्के घर कटान का ग्रास बनकर उफनाई नदियोँ के आगोश मेँ समा रहे है, नदियोँ की भटकती धाराएँ नये रास्ते खोज रही हैं भू-कटान करते हुए... वह मँदिर, मस्जिद, गुरुद्वारोँ को भी नहीँ बख्श रहीँ, जो कटान की जद मेँ आया पानी मेँ समा गया। .

घाघरा के बढ़ते कहर ने लोगोँ को आतंकित कर रखा है। कल कटान कर रही घाघरा ने गाँव भदईपुरवा के मजरे मिर्जापुर मेँ एक मस्जिद को कटान का शिकार बनाया।

लोग अपनी ज़िंदगी भर के खून पसीने की कमाई से बनवाए घर अपने हाथोँ से ढहा रहे हैं। लोग बेघर होकर आसमान के नीचे गुजारा करने को मजबूर हैं और अच्छे दिन लाने का वादा करके सत्ता मेँ आई पार्टी हजारोँ ग्रामीणोँ के इन बुरे दिनोँ पर निगाह डालना भी गँवारा नहीँ कर रही है ना ही उनके क्षेत्रीय जनप्रतिनिघि कोई रूचि लेते दिखाई दे रहे हैं।

इसी गाँव के लोगोँ ने कुछ दिन पहले नदी मेँ खड़े होकर जल समाधि लेने की घोषणा की थी तब प्रशासन ने झाँसा देकर उन्हें बाहर निकलवाया और आज बाढ़ खण्ड के अभियन्ता संसाधनोँ की कमी का रोना रो रहे हैं। कटान रोकने के लिए जो बंबू क्रेट बनवाए जा रहे हैं वह दूसरे ही दिन बह जा रहे हैं। अब क्षेत्रवासियोँ को पूर्व केंद्रीय मँत्री और काँग्रेस नेता जितिन प्रसाद याद आ रहे हैं, उनकी कटान रोकने की कोशिशेँ याद आ रही हैं और जितिन प्रसाद को ही वह फिर अपने बीच खड़ा भी पा रहे हैं।

विगत दिवस जितिन प्रसाद ने भदईपुरवा पहुँच कर और कटान के दहाने पर खड़े होकर कटानरोधी कार्योँ की अनदेखी करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को ललकारा। कटान पीड़ितों को ढाँढस बँधाने के बाद उन्होने पत्रकारोँ के सवालोँ का जवाब देते हुए कहा कि 2010-11 मेँ इसी समस्या को दिखाने के लिए तत्कालीन जल सँसाधन मँत्री पवन बँसल को ईसानगर के वीरसिँहपुर गाँव मेँ लाकर उतारा था और उन्हें कटान की विभीषिका दिखाकर कटानरोधी कार्योँ के लिए 55 करोड़ रुपये दिलवाए थे उसमेँ भी बाढ़खण्ड के लोगोँ ने हेरफेर शुरू किया तब पटना से गँगा फ्लड कँट्रोल कमीशन के वरिष्ठ अभियन्ताओँ और अधिकारियोँ को बुलाकर खुद उनके साथ जाँच करवाई मगर ठोकरें बनवाकर दर्जनों गाँवों को कटान का शिकार बनने से रूकवाया था।

जितिन प्रसाद ने कहा कि मैं नदियों की कटान रोकने के स्थाई उपाय करने को भी प्रयास कर रहा था, लेकिन हमारी सरकार चली गई। उन्होंने बताया कि नदियों के सिल्ट की सफाई, उनके पाट चौड़े कर जलग्रहण क्षमता बढ़ाना, नदियों को उनके पुराने रास्तों पर वापस ले जाना। किनारोँ पर बँधे बनवाना। उन पर वृक्षारोपण करवाना, ये बड़े बजट की और दीर्घकालिक योजना है, जिसमें मौजूदा केंद्र व राज्य सरकारें कोई रुचि लेते नहीं दिख रही हैं।

जितिन प्रसाद ने कहा कि आगे उनकी प्राथमिकता कटान रोकने का स्थाई उपाय करना होगी। उन्होंने विस्थापितो के पुर्नवास की समुचित व्यवस्था ना करवाने के लिए राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पुर्नवास की भी समुचित व्यवस्था नही कर पा रही है जब कि हजारोँ लोग प्रतिवर्ष भू-कटान से विस्थापित हो रहे हैं।

जितिन प्रसाद की सक्रियता के चलते कटान पीड़ितोँ का भी हौसला बढ़ा है और कटान के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जा रहे छोटे संगठनों - समूहोँ ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जितिन प्रसाद ने भदईपुरवा की कटान और जल समाधि के मामले को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को एक पत्र भी लिखा था।

रामेंद्र जनवार

रामेन्द्र जनवार , लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। वे लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री व ऑल इण्डिया स्टूडेंट्स फेडरेशन की उप्र इकाई के अध्यक्ष रहे हैं।