भोपाल एनकाउंटर - सांप्रदायिक आधार पर की गयी राजकीय हत्या
भोपाल एनकाउंटर - सांप्रदायिक आधार पर की गयी राजकीय हत्या
भोपाल एनकाउंटर - सांप्रदायिक आधार पर की गयी राजकीय हत्या
मधुवन दत्त चतुर्वेदी
कानून के राज से जनता का विश्वास तोड़ने वाले कृत्य देशद्रोह नहीं तो और क्या हैं ?
दुनिया में हिंदुस्तान की छवि यदि आधुनिक लोकतान्त्रिक देश की नहीं रही और सरकारें सांप्रदायिक मारकाट में शामिल हुईं तो ये देश छार-छार हो लेगा।
कहीं जाति है तो कहीं धर्म है कहीं भाषा है तो कहीं और किस्म के अंतर हैं। किस आधार पर कौन सरकार या सरकारी अधिकारी किसको शिकार बना बैठें और उसकी प्रतिक्रिया में कहाँ क्या हो कुछ नहीं कह सकते। सबके अपने तर्क होंगे कोई धर्म के पक्ष में कोई भाषा के पक्ष में कोई जाति के पक्ष में होगा।
भोपाल एनकाउंटर - आज जो फर्जी एनकाउंटरों को भी सरेआम सराह रहे हैं वे भारत को तोड़ने में लगे हैं।
भोपाल एनकाउंटर की सरकारी कहानी किसी भी सामान्य विवेक वाले मनुष्य के गले नहीं उतर रही है। सिवाय उनके जो इस बात से खुश हो सकते हैं कि आठ मुसलमान मार दिए गए हर हिंदुस्तानी के लिए यह चिंता की बात है।
सरकारी कहानी और हालात से पता चलता है कि ये राजकीय हत्या है।
यह सामूहिक हत्या सांप्रदायिक आधार पर की गयी है। यह कानून के राज , जनतंत्र , न्यायपालिका और संविधान पर हमला है। यह भारत को गृहयुद्ध में धकेलने की साजिश का हिस्सा है।
भोपाल एनकाउंटर की सरकारी कहानी किसी भी सामान्य विवेक वाले मनुष्य के गले नहीं उतर रही है। सिवाय उनके जो इस बात से खुश हो सकते हैं कि आठ मुसलमान मार दिए गए हर हिंदुस्तानी के लिए यह चिंता की बात है। सरकारी कहानी और हालात से पता चलता है कि ये राजकीय हत्या है। यह सामूहिक हत्या सांप्रदायिक आधार पर की गयी है। यह कानून के राज , जनतंत्र , न्यायपालिका और संविधान पर हमला है। यह भारत को गृहयुद्ध में धकेलने की साजिश का हिस्सा है।
(मधुवन दत्त चतुर्वेदी की फेसबुक टिप्पणियों का समुच्चय)


