यह एक बहुत बढ़िया विचार है । इस विचार में सब कुछ है सदाचार भी और कदाचार भी । जैसे राजपाट में वापसी के बाद मुख्य मंत्री ने तय किया कि भ्रष्टाचार का अचार बनाया जाए । अचार और खिचड़ी का बड़ा मधुर संबंध होता है । इसी मधुर संबंध पर तो कहावत है कि खिचड़ी के चार यार – दही ,पापड़ ,घी और अचार । अब न बड़े बड़े भ्रष्टाचार होने लगे हैं । पुराना भ्रष्टाचार तो जन वितरण प्रणाली ही हुआ करता था । किसी जमाने में इसका भी एक कार्ड होता था – राशन कार्ड । इस राशन कार्ड के बिना जीवन अधूरा अधूरा सा लगता था । इस कार्ड पर सब कुछ मिलता था । सिर्फ वह नहीं मिलता था जो देने का वादा यह कार्ड करता था । अब कार्ड भी आसानी से नहीं मिलता । यह युद्ध क्षेत्र भी हो गया है क्योंकि यह आंकड़ा हो गया है ।
इस युद्ध क्षेत्र का सबसे बड़ा हथियार आंकड़ा होता है । यह शोध का विषय है कि आंकड़ा सदाचार है या कदाचार या भ्रष्टाचार । आपको तो पता है कि राजपाट ही नहीं , सरकार भी आंकड़े से ही चलती है । बिहार की सरकार भी आंकड़े से चलती है और भारत सरकार भी आंकड़े से चलती है । कभी कभी भारत सरकार आंकड़े से नहीं चलती है । यह भी कह सकते हैं कि जैसे संसद नहीं चलती है ,वैसे ही भारत सरकार भी नहीं चलती है । अभी बिहार सरकार और भारत सरकार में बड़ा भारी आंकड़ा युद्ध चल रहा है । इसमें से एक असत्यवादी है । ऐसा बहुत कम होता है कि सरकार दो हों और असत्यवादी एक हों । सरकार हमेशा असत्य का निर्वहन करती है । उसके पास आंकड़ों का सत्य होता है । यहां भी है । यह बड़ा ही गंभीर विषय है । इसकी गंभीरता के सामने राडिया टेपवाणी कुछ भी नहीं है ।
तो मुद्दा यह है – हालांकि मुद्दे इतने हैं कि किस मुद्दे को मुद्दा मान जाए , इस पर भी संसद के समान कीबोर्ड चलने से इनकार कर देता है । पर यह एक गंभीर मुद्दा है । इस मुद्दे से गरीब जुड़े हैं । सच पूछिए तो गरीब ही नहीं एक पूरी प्रणाली जुड़ी है । इसे जन वितरण प्रणाली कहते हैं । यूं भी कह सकते हैं कि इसमें जन न के बराबर होता है । जब जन नहीं होगा तो वितरण कहां से होगा और जब वितरण ही नहीं होगा तो प्रणाली क्यों होगी । पर है जन वितरण प्रणाली । इस प्रणाली से रिश्ता जुड़ गया है गरीब का । इस गरीब के साथ एक अच्छी बात होती है कि यह जाति – धर्म – पार्टी से ऊपर होता है और भ्रष्टाचार से नीचे होता है ।
तो सवाल यह है कि बिहार में किसने केंद्र सरकार को यह आंकड़ा दिया कि बिहार में केवल 65 लाख परिवार ही गरीब हैं । क्या गरीब पैदा करने का केंद्र सरकार का अपना आकंड़ा तंत्र है । जो भी भारत सरकार बिहार में 65 लाख गरीब ही मानती है । बिहार सरकार का बस चले तो वह बिहार में किसी को गरीब न माने । यह तो माने कि जो स्कारपियो वाले हैं , वह अमीर हैं और जिनके पास स्कारपियो नहीं है , वह गरीब है । बहरहाल बिहार सरकार मानती है कि बिहार में डेढ़ करोड़ परिवार गरीब है । 85 करोड़ परिवार का फासला है । इनका ही भ्रष्टाचार का अचार बनाया जा रहा है । आदतन मुख्य मंत्री सबको खाद्यान्न उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं । योजना का मतलब तो पांच साल होता है । मुख्य मंत्री को एक सप्ताह के अंदर योजना चाहिए । अगले पांच साल तक उसका अचार बनाया जाएगा । सीएजी इस पर टिपण्णी कर सकता है कि बिहार में बनाया गया भ्रष्टाचार का अचार