तनवीर जाफरी

वरिष्ठ गांधीवादी नेता एवं समाजसेवी अन्ना हज़ारे आखिरकार दिल्ली के रामलीला मैदान पर 15 दिनों तक का अनशन करने पर मान गए। उन्होंने 16 अगस्त को आमरण अनशन की शुरुआत कर केंद्र सरकार तथा दिल्ली प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। बेशक प्रशासन ने अन्ना को नई दिल्ली के प्रस्तावित अनशन स्थल जे पी पार्क तक नहीं जाने दिया तथा उन्हें अनशन स्थल जे पी पार्क तक पहुंचने से पूर्व 16 अगस्त को ही उनके घर से बाहर निकलते ही गिरफ्तार कर लिया। परंतु अन्ना हज़ारे ने पुलिस हिरासत में रहते हुए ही अपना अनशन अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ शुरु कर दिया। बहरहाल अन्ना व उनकी टीम के कुछ प्रमुख साथियों की गिरफ्तारी के बाद न केवल दिल्ली में बल्कि पूरे देश में अन्ना समर्थकों या यूं कहें कि भ्रष्टाचार से दु:खी लोगों ने अन्ना के समर्थन में इतनी एकजुटता दिखाई कि आखिर कार सरकार को अन्ना हज़ारे को रिहा करने का फैसला करना पड़ा है। यह और बात है कि अन्ना ने प्रशासन के रिहाई के प्रस्ताव को सशर्त मानने से इंकार कर दिया था तथा अपनी 16 अगस्त की स्थिति पर पुन: कायम रहने अर्थात् जेपी पार्क पर पहुंचकर अनशन करने की अपनी शर्त पर ही जेल से बाहर निकलने की बात पर अड़े हुए थे। परंतु काफी मान-मनौव्वल के बाद तथा दिल्ली पुलिस के साथ कानून व्यवस्था के विषय पर हुई कई बैठकों के पश्चात अन्ना को रामलीला मैदान पर 15 दिनों तक का अनशन करने की शर्त पर राज़ी कर लिया गया।

इसमें कोई शक नहीं कि भ्रष्टाचार इस समय देश को दीमक की तरह खोखला किए जा रहा है। एक ओर इसी देश में आर्थिक तंगी के चलते जहां गरीब लोग आत्महत्याएं करने को मजबूर हो रहे हैं,लाखों लोगों को देश में दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो पा रही है और इसी गरीबी व बेरोज़गारी के चलते देश में चोरी,डकैती,अराजकता,लूट-खसोट यहां तक कि भिखारियों व मवालियों की सं या में भारी इज़ाफा हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर सत्ता पर बैठे चंद लोग अथवा भ्रष्ट अधिकारी या नेता-अधिकारी नेटवर्क से जुड़े भ्रष्ट लोग अपनी दौलत में अकल्पनीय वृद्धि करते जा रहे हैं। इन भ्रष्टाचारियों के हौसले केवल इतने ही बुलंद नहीं हुए कि यह केवल देश को आर्थिक नुकसान ही पहुंचा रहे हों तथा देश को आर्थिक खोखलेपन की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे हों बल्कि उनके हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब यह भ्रष्ट व रिश्वतखोर वर्ग अपने धनबल तथा बाहुबल के द्वारा उस आवाज़ को खामोश करना भी बखूबी जान गया है जो आवाज़ उनके भ्रष्ट कारनामों के विरुद्ध उठती हो। देश में तमाम घटनाएं ऐसी हो चुकी हैं जिसमें भ्रष्ट लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, आर टी आई कार्यकर्ताओं, ईमानदार अधिकारियों व पत्रकारों तथा भ्रष्टाचार के नेटवर्क को बेनकाब करने वालों की हत्याएं तक कर दी गईं।

अन्ना हज़ारे के आंदोलन में जो युवा वर्ग तथा गैर राजनैतिक वर्ग एवं वास्तविक राष्ट्रप्रेमी तबक़ा उनके साथ खड़ा है उस का वास्तव में स्वागत किया जाना चाहिए। उनका इस आंदोलन को दिया जाने वाला ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व समर्थन न केवल सराहनीय बल्कि पूरी तरह से राष्ट्रहित में भी है। परंतु अन्ना के आंदोलन को जिस प्रकार कुछ राजनैतिक दल अपनी दलीय राजनीति का माध्यम बनाना चाह रहे हैं वह सर्वथा अनुचित है। अन्ना की पीठ पर सवार होकर अपनी नैया पार लगाने की राजनैतिक दलों की कोशिश हालंाकि जनता की आंखों में तो धूल नहीं झोंक सकती हां उनके अन्ना के समर्थन में खुलकर खड़े होने से अन्ना का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ज़रूर बदनाम व कमज़ोर हो सकता है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी अन्ना हज़ारे समर्थन में बातें करते दिखाई दे रही है। ज़ाहिर है देश के नागरिक तो यह ज़रूर जानना चाहेंगे कि क्या भाजपा तथा उसके तमाम नेता भ्रष्टाचार से पूरी तरह पाक-साफ हैं? कर्नाटक के भ्रष्ट मुख्य मंत्री येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद उन्हें मुख्य मंत्री के पद से हटाने के लिए वाहवाही लूटने की कोशिश में लगी भाजपा मध्य प्रदेश तथा उत्तरांचल सरकारों व इनके मंत्रियों व मुख्य मंत्रियों पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब नहीं दे पाती। वाईब्रेंट गुजरात के जूनागढ़ से एक भाजपाई सांसद दीनू भाई सोलंकी ने अपने भतीजे से एक आर टी आई कार्यकर्ता अमित जेठवा की दिन-दहाड़े पूर्व चेतावनी देकर हत्या करवा दी। अमित ने दीनू भाई सोलंकी द्वारा गिर वन क्षेत्र में कराए जा रहे अवैध खनन के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत कुछ जानकारी प्राप्त करनी चाही थी। भाजपाई सांसद दीनू भाई सोलंकी का यह हत्यारा भतीजा अभी भी जेल में बंद है। इसी प्रकार देश में अब तक सात आर टी आई कार्यकर्ताओं की हत्या बाहुबली भ्रष्टाचारियों द्वारा की जा चुकी है।16 अगस्त की सुबह जब पुलिस अन्ना हज़ारे को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई उसके बाद देश के कई शहरों में अन्ना के समर्थक भारी सं या में उमड़ पड़े। भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी अन्ना के समर्थन में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश की प्रमुख आर टी आई कार्यकर्ता शैला मसूद जब अपने घर से धरना स्थल के लिए निकली उसी समय कुछ बदमाशों ने उन्हें उनकी कार में गोली मार कर हत्या कर दी। शैला मसूद मध्यप्रदेश स्थित पन्ना टाईगर रिज़र्व तथा श्यामरी नदी के वाटरशेड को रियो टिंटो कंपनी द्वारा किए जा रहे अवैध खनन के विरुद्ध थीं। इसके अतिरिक्त भी उन्होंने राज्य के कई मंत्रियों व अधिकारियों के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा था। शैला मसूद 16 अगस्त को अन्ना के समर्थन में 100 मीटर के एक विशाल बैनर पर एक ऐसा अनूठा हस्ताक्षर अभियान चलाने वाली थीं जिसपर प्रदेश के लोगों से यह लिखवाया जाना था कि राज्य का सबसे भ्रष्ट मंत्री,नेता या अधिकारी कौन है? परंतु भ्रष्टाचार विरोधी इस आवाज़ को दबा दिया गया। हत्यारों ने इस बात का भी ख्याल नहीं किया कि जिसकी वे हत्या कर रहे हैं वह ईमानदारी व सच्चाई की राह पर चलने वाली एक देशभक्त महिला हैं। किसी तथाकथित 'सांस्कृतिक राष्ट्रवादी ने भी इस आर टी आई कार्यकर्ता की 16 अगस्त को हुई हत्या पर एक शब्द भी नहीं कहा। लच्छेदार भाषणों में महारत रखने वाले भाजपाई प्रवक्ता संसद में भी सरकार की कारगुज़ारियों को तो कोसते रहे परंतु भाजपा शासित राज्य में हुए इतने बड़े हादसे पर इनके 'मुखश्री से कुछ न निकला।मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी 16 अगस्त को अन्ना हज़ारे की पुलिस द्वारा दिल्ली में की गई गिरफ्तारी पर तो अपना विरोध दर्ज करते नज़र आए परंतु अपने राज्य की राजधानी में भ्रष्टाचारियो