मजदूर नेता की गिरफ्तारी के तीन दिन बाद बोकारो पुलिस ने प्रेस कांफ्रेन्स कर जनता के सामने पेश किया
मजदूर नेता की गिरफ्तारी के तीन दिन बाद बोकारो पुलिस ने प्रेस कांफ्रेन्स कर जनता के सामने पेश किया
पुलिस ने 31 मई को किया था गिरफ्तार
परिजनों को नहीं दी गई थी कोई सूचना
फेसबुक से हुई थी उनकी गिरफ्तारी जानकारी
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रांची, 03 जून। झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत चंदनकियारी के पर्वतपुर गांव के महावीर मंडल के घर में ठहरे हुए मजदूर नेता मजदूर संगठन समिति के केंद्रीय महासचिव बच्चा सिंह और केंद्रीय सचिव दीपक कुमार को पिछले 31 मई की रात 11 बजे झारखंड पुलिस उस वक्त गिरफ्तार करके ले गई जब दोनों घर के छत पर सो रहे थे। इसकी जानकारी अन्य लोगों को तब हुई जब उसी गांव के गणेश रजवार Ganesh Rajwar द्वारा दूसरे दिन एवं बोकारो थर्मल के एक पत्रकार Rajesh Kumar द्वारा 2 जून को अपने फेसबुक पर उक्त गिरफ्तारी को लेकर पोस्ट किया गया। मगर उन दोनों नेताओं की गिरफ्तारी की सूचना पुलिस की तरफ से उनके घर वालों को तीन दिन तक नहीं दी गई, जिसके कारण उन दोनों मजदूर नेताओं के घर वाले काफी परेशान रहे। जबकि यह गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस के सहयोग से की गई थी।
जब यह मामला फेसबुक पर वायरल हुआ तब बोकारो के एसपी कार्तिक एस द्वारा प्रेस कांफ्रेन्स करके दोनों नेताओं को प्रेस के सामने लाया गया और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दोनों नेताओं पर माओवादियों से संबंध होने का खुलासा किया गया है कि इनके द्वारा मजदूर संगठन चला कर ठेकेदारों से लेवी लेकर माओवादियों तक पहुंचाई जाती थी और पुलिस की गतिविधि की सूचना नक्सलियों तक पहुंचाई जाती थी।
विज्ञप्ति में उनकी गिरफ्तारी किन—किन कांडों को लेकर की गई है, का ब्योरा दिया गया है। विज्ञप्ति में बताया गया कि उन दोनों के पास से चार मोबाइल बरामद किए गए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में जिक्र है कि झारखंड सरकार के अधिसूचना सं0 18/12 आ0 शु0 (29) 07/09—ज्ञा0 7233 दिनांक 22.12.17 के द्वारा भाकपा माओवादी के अग्र संगठन मजदूर संगठन समिति को उसके गठन की तिथि से अवैध घोषित की गई हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बच्चा सिंह के खिलाफ जो मामले विभिन्न मामले दर्ज हैं उनमें बोकारो थर्मल थाना कांड संख्या—72/05 दिनांक 07/12/2005 धारा—124 (a) भादवि एवं 17 (l)(ll) सी0 एल0 एक्ट.
गोमिया थाना कांड संख्या—135/2000 दिनांक 27/12/2000 धारा—364/120B/34 धारा 25(1b)a26/35आर्म्स एक्ट.
गोमिया थाना कांड संख्या—136/2000 दिनांक 27/12/2000 धारा—25 (1b)a26/35आर्म्स एक्ट.
गिरिडीह मुफसिल थाना कांड संख्या—346/147 दिनांक 07/11/2017 धारा—147/148/149/341/323/504/506/353 भादवि.
कतरास थाना कांड संख्या—13/18 दिनांक 21/01/2018 धारा—13 यूएपी एक्ट एवं 17 सी0 एल0 एक्ट.
बताते चलें कि पिछले 22 दिसंबर 2017 को मजदूर संगठन समिति को झारखंड सरकार द्वारा माओवादियों का फ्रंटल संगठन बताते हुए प्रतिबंधित कर दिया गया था, जबकि मजदूर संगठन समिति जिसका पंजीयन संख्या 3113/89 है, जो 1989 से रजिस्टर्ड संगठन के तहत मजदूरों के हित में काफी सकारात्मक काम करता आ रहा है।
बता दें कि मजदूर संगठन समिति के कई नेताओं पर कई थानों में मुकदमे भी लाद दिए गए, साथ ही इनके कई कार्यालयों सहित केन्द्रीय कार्यालय को सील कर दिया गया। कई शाखाओं के बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए, यहां तक कि गिरिडीह जिला के मधुबन में संचालित 'श्रमजीवी अस्पताल' को भी सील कर दिया गया। प्रतिबंध लगाने के बाद से अब तक 'मजदूर संगठन समिति' के लगभग दो दर्जन नेताओं व कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मसंस को झारखंड सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बाद संगठन के नेताओं ने उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी है, जिसका फैसला अदालत में विचाराधीन है। इस संगठन के झारखंड के अलावा देश के अन्य राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल आदि में भी कई शाखाएं लम्बे समय से कार्यरत रही हैं।
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बोकारो थर्मल या चंद्रपुरा का डीवीसी प्लांट हो या गिरिडीह के मधुबन का जैन तीर्थ स्थल पारसनाथ की कोठियों में काम करने वाले हजारों डोली मजदूर, सभी उक्त मजदूर संगठन से जुड़े थे और मजदूर संगठन समिति इन मजदूरों के हक अधिकार की लड़ाई लड़ती रही थी। अत: इस संगठन पर प्रतिबंध के बाद ठेकेदरों, डीवीसी प्रबंधन तथा कोठी के प्रबंधको की मनमानी पुन: मजदूरों के खिलाफ होना शुरू हो चुका है। बावजूद मजदूर अपने हक अधिकार की लड़ाई में पीछे नहीं हटे हैं।


