मनुवादी पुनरूत्थानवाद या ब्राह्मणी मनुवाद
मनुवादी पुनरूत्थानवाद या ब्राह्मणी मनुवाद
मनुवादी पुनरूत्थानवाद या ब्राह्मणी मनुवाद
जरूरत है, समाज में नये किस्म के लोकतांत्रिक जागरण के लिये काम करने की।
उर्मिलेश
कुछ समय पहले किसी मित्र ने चर्चा के दौरान सवाल उठाया कि अपने देश में जो निरंकुश-सांप्रदायिकता की शक्तियां सक्रिय हैं, उन्हें हम सिर्फ 'हिन्दुत्व' के रूप में क्यों चिन्हित करते हैं, दरअसल, वे भारतीय समाज में 'ब्राह्मणवादी मनुवाद' के पुनरूत्थान की शक्तियां हैं। इन्हें 'ब्राह्मणी-मनुवाद' या 'मनुवादी पुनरूत्थानवाद' शक्ति कहा जाना चाहिये।
आप ध्यान से देखिये तो पायेंगे कि इनके संगठन, सत्ता-संचालन, प्रशासन और बौद्धिक संरचना में हर जगह समाज को सदियों सड़े-गले मनुवादी मान-मूल्यों की तरफ ले जाने की बात करने वाले लोग ही आगे-आगे हैं।
दलितों-पिछड़ों-अल्पसंख्यकों को ही नहीं, सवर्ण समाजों के तरक्कीपसंद लोगों को भी इस मनुवादी पुनरूत्थानवाद के खतरों पर गौर करना चाहिये।
जरूरत है, समाज में नये किस्म के लोकतांत्रिक जागरण के लिये काम करने की।


