अब्दुल रशीद

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के सिपाही का जनसम्पर्क अधिकारी के सामने जहर खाकर पहुँचना और जहर खाने से पहले डीजीपी को अपने ख़ुदकुशी की जानकारी एसमएस के माध्यम से भेजना इस बात की तस्दीक करता है कि वह मरना नहीं चाहता था लेकिन उसके पास मौत के सिवा कोई विकल्प नहीं था।

मध्य प्रदेश के मीडियाकर्मी व पीआईएल एक्टिविस्ट राजेन्द्र कुमार ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हड़पने वाले अफसरों का सच दुनिया के सामने लाना इतना बड़ा गुनाह हो गया कि उन्हें मौत को गले लगाने को विवश होना पड़ा और प्रदेश के सबसे सुरक्षित जगह पर और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाये रखने वाले को सूचना होने के बावजूद बचाया न जा सका। तो क्या मध्य प्रदेश में सच लिखने और सच उजागर करने वाले को सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि उनकी हिफाजत करने वाला कोई नहीं? कहते है जनसम्पर्क मीडिया का अपना विभाग होता है जो मीडियाकर्मियों के सुख दुःख का ध्यान रखती है? लेकिन यह घटना तो कुछ और ही बयॉँ करती है।

जानकारी के अनुसार मीडियाकर्मी राजेन्द्र कुमार (४८) पिता लालचंद निवासी अवधपुर ने मंगलवार को मंत्रालय पहुँच कर जहर खा लिया। जहर खाने से पहले अपनी ख़ुदकुशी की सूचना डीजीपी नंदन दुबे और कुछ अन्य मीडियाकर्मियों को देने के साथ 23 पेज का सुसाइड नोट अपने सहयोगी को दे दिया था जिसमें 33 अधिकारीयों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। राजेन्द्र ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों की प्रताड़ना और आए दिन जान से मारने की धमकी से आजीज हो कर मौत को गले लगा रहा है। सुसाईड नोट में यह भी लिखा है कि प्रताड़ना की शिकायत डीजीपी, आईजी और एसपी से भी की थी, पर किसी ने नहीं सुनी। इस से अधिकारी राजेन्द्र के पीछे पड़े हुये थे और आये दिन जान से मारने की धमकी मिलती थीं।

जहर खाने के बाद राजेन्द्र बल्लभ भवन के चौथी मंजिल पर स्थित प्रेस सचिव अशोक मनवानी के केबिन में पहुँचा और पहुँचाने के बाद उलटी करने लगा। हालत बिगड़ता देख वहाँ उपस्थित अधिकारियों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। आनन् फानन में पुलिस वहाँ पहुँची और वहाँ से जेपी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरो ने गम्भीर हालत देख हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया जहाँ उसकी इहलीला समाप्त हो गयी।
क्या लिखा था डीजीपी को एसएमएस में
डीजीपी सर मैंने एससी के फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर सरकारी नौकरी हड़पने वाले 250 से अधिक लोगों के विरुद्ध हाईकोर्ट में पीआइएल 4743/09 फाइल की है। इसमें डॉ शैलेन्द्र खामारा, अंकिता खामारा, रविन्द्र खामारा (33 लोग) आदिम जाति कल्याण विभाग के अतरिक्त संचालक एसएस भंडारी की प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर सुसाइड कर रहा हूँ। ये लोग आठ साल से मुझे जान से मारने की धमकी दे रहें हैं। ये सभी मेरी सुसाईड के जिम्मेदार है।

(मीडियाकर्मी व पीआईएल एक्टिविस्ट राजेन्द्र कुमार)

अब यह देखने वाली बात होगी कि पत्रकार को मरने के लिये मजबूर करने वाला मध्य प्रदेश प्रशासन अपने ही प्रशासन के खिलाफ कार्यवाही करता है या पत्रकार की मौत की खबर कागजों में समेट कर रद्दी की तरह फ़ेंक दी जाती है।