महिला हिंसा के विरूद्ध ‘‘अब तो जागो’’
महिला हिंसा के विरूद्ध ‘‘अब तो जागो’’
फैजाबाद, 9 दिसम्बर। महिला हिंसा के विरूद्ध ‘‘अब तो जागो’’ अभियान के तहत अवध पीपुलस फोरम, इनर व्हील फैजाबाद-मैत्री, सेवा योजना राजा मोहन गर्ल्स पी. जी. कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में ‘मस्ट बोल’ फिल्म सीरीज की ‘कॉट’, ‘मैन इन कीचिन’, ‘लड़का या लड़की’, ‘ओ भाई’ और ‘थिंक बियॉण्ड’ फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ परिचर्चा करते हुए शिल्पी चौधरी ने कहा कि महिला हिंसा के खिलाफ हमको आगे आना चाहिए, छेड़ख़ानी के विरोध में आवाज़ उठाएँ, यह न सोचें कि आप शर्मिन्दा होंगी। गलत को गलत कहिए, आगे आईए। किसी भी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति का अधिकार हनन करने का हक़ नहीं है।
प्रधानाचार्या डॉ. ज़रीन नज़र ने कहा कि हमको अपने भीतर इतनी हिम्मत पैदा करनी है कि हर प्रकार की विपरीत परिस्थिति का हम स्वयं मुकाबला कर सकें। जो भी महिलाओं के सामने चुनौती आए उसके खिलाफ हम सभी को मिलकर साथ खड़ा होना चाहिए। जहाँ भी आपके साथ उचित व्यवहार न हो, उस स्थान पर अपनी विल पाॅवर के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
अध्यापिका डॉ. सुषमा पाठक ने कहा कि बच्चों में नर से मादा शिशु मृत्यु दर कम है। क्यों कि लड़कियों में ऊर्जा और क्षमता पुरूषों के मुकाबले अधिक है। हमको अपने सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को समझना चाहिए। महिलाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप कार्य करने और जानने की आवश्यकता है। नारी की पहचान और सम्मान, परिवार और समाज को देना चाहिए। कानूनों का उचित प्रकार से उपयोग होना चाहिए। जो गलती करे उसको कानून से दण्ड मिलना चाहिए।
डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि हमको 1090 नम्बर का उपयोग करना चाहिए, इससे छेड़छाड़ को रोका जा सकता है और महिलाओं के प्रति हिंसा भी थमेगी। यदि लड़कियाँ आवाज़ उठाएँ तो अपने खिलाफ़ होने वाली शारीरिक और मानसिक हिंसा को रोक सकती हैं।
फोरम के गुफरान सिद्दीकी ने कहा कि देश में हरियाणा राज्य में पुरूषों के मुकाबले महिलाओं का अनुपात बहुत कम है। जो हमारे समाज की संकीर्ण मानसिकता को सामने लाती है। जहाँ आज भी लड़कियों को दुनिया में आने से पहले ही खत्म कर दिया जाता है। हमें इस संकीर्ण सोच को बदलने के लिए काम करना चाहिए। इस मुद्दे पर समाज की खामोशी उचित नहीं है। बराबरी का समाज बनाने के लिए कदम आगे बढ़ाएँ और बेहतर समाज का निर्माण करें।
परिचर्चा का संचालन करते हुए आफ़ाक़ उल्लाह ने कहा कि जैसा हम समाज बनाते हैं वैसा ही समाज बनता है। इसके लिए महिलाओं के साथ-साथ पुरूषों को भी अपनी सोच में परिवर्तन करना होगा, तभी सबके लिए बराबरी का अवसर उपलब्ध हो पाएगा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की अध्यापिका डॉ. रूकैया जाफ़री, डॉ. रोमा अरोड़ा, डॉ. गीता सिंह, डॉ. फहमीदा खान, डॉ. सुधा राय, डॉ. मीरा दुबे के साथ फोरम के आशीष कुमार, दीपक कुमार और ख़बर लहरिया की पत्रकार हिना बानो मुख्य रूप से मौजूद रहीं।


