महुआ पेड़ों की नंबरिग और बंटवारे के विरोध में ग्रामीणों ने दर्ज कराई आपत्ति
महुआ पेड़ों की नंबरिग और बंटवारे के विरोध में ग्रामीणों ने दर्ज कराई आपत्ति
वन विभाग के द्वारा किए गए महुआ पेड़ों की नंबरिग के खिलाफ 550 से अधिक ग्रामीणों ने दाखिल किया आपत्ति पत्र
सिंगरौली, 26 जूलाई। वन विभाग व राजस्व विभाग के द्वारा महान वन क्षेत्र में किये गए महुआ पेड़ों के सर्वे और बंटवारे के विरोध में आज अमिलिया के ग्रामीणों ने तहसीलदार के नाम अपनी आपत्ति दर्ज करवाई। अमिलिया गांव में लगे एक शिविर में ग्रामीणों ने पटवारी और कानूनगो को अपना आपत्ति पत्र सौंपा।
करीब 550 से ज्यादा संख्या में लोगों ने तहसीलदार के यहां जाकर अपना-अपना आपत्ति पत्र जमा करवाया। कुछ दिन पहले ही जंगल विभाग और राजस्व विभाग ने महान कोल लिमिटेड को प्रस्तावित जंगल क्षेत्र में महुए के पेड़ों की नंबरिंग और बंटवारा कराकर ग्रामीणों को नोटिस जारी किया था, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया है।
ग्रामीणों के अनुसार जंगल में महुआ के पेड़ों का बंटवारा पुरुखों के जमाने से होता आया है और इसे गांव के लोग ही करते आए हैं। वन अधिकार समिति अमिलिया के अध्यक्ष हरदयाल सिंह गोंड ने कहा कि, ‘वनाधिकार कानून 2006 के तहत जंगल में किसी तरह की योजना, प्रबंधन और हंस्तातरण करने का फैसला उस वन क्षेत्र के ग्राम सभा को दिया गया है। ऐसे में वन विभाग और राजस्व विभाग का कंपनी के साथ मिलकर महुए के पेड़ का नामांकन और बंटवारा वनाधिकार कानून 2006 के तहत अवैध है। जंगल में किसी तरह के कार्य का निर्णय बिना ग्राम सभा की अनुमति के नहीं हो सकता है’।
अमिलिया गांव के ही निवासी हीरामणी सिंह गोंड ने भी अपनी आपत्ति दर्ज करवायी है। उनके अनुसार, ‘जंगल में महुए के पेड़ का बंटवारा पंरपरागत रूप से होता आया है और इसके बारे में कोई भी निर्णय गांव के लोग ही लेते आये हैं। इसलिए हम लोग इस नामांकन के खिलाफ अपना आपत्ति दर्ज करवा रहे हैं’।
अपने आपत्ति पत्र में ग्रामीणों ने वनाधिकार कानून 2006 के तहत सामुदायिक वनाधिकार की मांग की। हरदयाल ने सवाल उठाया कि, ‘जब प्रशासन जंगल के आवंटन के लिए और वनाधिकार कानून पर नयी ग्राम सभा का आयोजन करवा रहा है तो ग्राम सभा के परिणाम आने से पहले जंगल में पेड़ों की नंबरिग और उनका बंटवारा क्यों करवाया जा रहा है’।
दूसरी तरफ शासन की तरफ से महान वन क्षेत्र में आने वाले दूसरे गांवों जैसे सुहिरा, बंधौरा, बुधेर, बरवाटोला, बंधा आदि गांवों में किसी भी तरह का वनाधिकार कानून के तहत प्रक्रिया नहीं शुरू की जा सकी है, जिससे इन गांवों के ग्रामीण चिंतित हैं।महुआ पेड़ों के सर्वे और बंटवारे,अमिलिया,महान कोल लिमिटेड,वन अधिकार समिति अमिलिया ,वनाधिकार कानून 2006 ,जंगल में महुए के पेड़ का बंटवारा,


