सिंगरौली, 30अगस्त। महान जंगल में अवैध रूप से महुआ के पेड़ पर हो रहे नम्बरिंग कार्य के खिलाफ महान संघर्ष समिति के सदस्यों ने 27 अगस्त को जिला अधिकारी कार्यालय सिंगरौली में आयोजित जन सुनवाई शिविर में आवेदन सौंपा। साथ ही, उन्होंने नायब तहसीलदार तहसील सिंगरौली से मिल कर भी आवेदन सौंपा।

आवेदन में कहा गया है कि महान जंगल में महुआ के पेड़ों नम्बरिंग कार्य किया जा रहा था। इसकी जानकारी मिलते ही अमिलिया और बुधेर के करीब चार सौ ग्रामीण जंगल में इकट्ठा हो गये। ग्रामीणों द्वारा छानबीन करने पर पता चला कि यह कार्य कम्पनी और जंगल विभाग के अधिकारियों के द्वारा करवाया जा रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार माड़ा ने ग्रामीणों से कहा कि अमिलिया के ग्रामवासी अपना-अपना महुआ लिखवा लीजिये जिससे मुआवजा बनेगा लेकिन ग्रामीणों द्वारा मुआवजा से इन्कार किये जाने पर तहसीलदार साहब ने कहा कि ग्रामीणों का जंगल पर कोई अधिकार नहीं है और जंगल पर जंगल विभाग एवं भारत सरकार का अधिकार है। कोयला खदान का खुलना तय है।

संघर्ष समिति के सदस्यों ने ज्ञापन में अपने अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है तथा प्रशासन से माँग की है कि इस सम्बंध में उचित कार्यवायी की जाय।

संघर्ष समिति के सदस्य व अमिलिया के निवासी रामनाथ यादव ने कहा कि जब भारत सरकार द्वारा वनाधिकार कानून 2006 के तहत सदियों से जंगल पर जीविका के लिये निर्भर लोगों को उनके जंगल पर अधिकार दिये जाने का कानून है तो फिर कैसे तहसीलदार साहब कह रहे हैं कि जंगल पर जनता का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने आगे प्रशासन से माँग की कि सबसे पहले हमको जंगल पर वनाधिकार कानून के तहत सामुदायिक अधिकार प्रदान किया जाय। जब तक ग्रामीणों को जंगल पर अधिकार नहीं मिल जाता तब तक जंगल में कोई भी कार्य न किया जाय।

अमिलिया निवासी और संघर्ष समिति के कार्यकर्ता कांति सिंह खैरवार ने सवाल उठाया कि "जब हमारा जंगल पर कोई अधिकार नहीं है तो फिर महुआ के पेड़ों पर नम्बरिंग करके हमें मुआवजा देने की बात कहाँ से आ गयी।"

महान संघर्ष समिति महान जंगल पर सामुदायिक वनाधिकार पाने की प्रक्रिया को शुरु कर चुके हैं। संघर्ष समिति के सदस्य अक्षय गुप्ता ने 25 जून को आदिवासी विकास कार्यालय में सिंगरौली जिले में गांव स्तर पर गठित वन अधिकार समिति की पूर्ण जानकारी के लिए आरटीआई के तहत आवेदन दिया है लेकिन अभी तक जानकारी नहीं मिल सकी है। सामुदायिक वनाधिकार कानून लागू करने के लिये वन अधिकार समिति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

महान संघर्ष समिति के सदस्यों ने गुरुवार को अमिलिया में बैठक कर निर्णय लिया है कि वे वनाधिकार कानून के तहत जंगल पर अपने अधिकार को लेने के लिए शांतिपूर्वक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।