माना कोयला मंत्रालय ने, नहीं होगी महान कोल ब्लॉक की नीलामी
माना कोयला मंत्रालय ने, नहीं होगी महान कोल ब्लॉक की नीलामी
नई दिल्ली। 20 मार्च 2015। कोयला मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि महान कोल ब्ल़ॉक की नीलामी नहीं की जाएगी। मंत्रालय ने यह निर्णय पर्यावरण व वन मंत्रालय के उस सुझाव पर लिया है जिसमें महान कोल ब्लॉक को खनन से बाहर रखने की बात कही थी। सरकार के इस फैसले से एस्सार एनर्जी को बड़ा झटका लगा है जिसे अपने पावर प्लांट के लिये जंगल में खनन करने की उम्मीद थी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने कहा, “सरकार के इस फैसले से ग्रीनपीस और महान संघर्ष समिति के चार सालों से प्रस्तावित खदान के विरोध में चल रहे आंदोलन को वैधता मिली है। सरकार के एक वर्ग द्वारा राष्ट्रविरोधी कहने के बाद खुद सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला स्वागतयोग्य है। महान वन क्षेत्र बेहतरीन जंगलों में से एक है, जहां लुप्तप्राय कुछ वन प्रजातियां रहती हैं और जिस पर हजारों लोगों की आजीविका निर्भर है। इसलिए इसे संरक्षित करने की जरुरत है”।
अमिलिया निवासी और महान संघर्ष समिति के सदस्य बेचनलाल साह ने कहा, “इस खबर को सुनने के बाद से ही हमारे यहां उत्सव जैसा माहौल हो गया है। अंततः सरकार ने माना कि जो जंगल हजारों लोगों को आजिविका देता है, उसे चंद उद्योगपतियों के लिये खत्म नहीं किया जाना चाहिए। हमलोग जंगल पर सामुदायिक वनाधिकार पाने के लिये अपना संघर्ष जारी रखेंगे, जिससे हमें भविष्य में अपनी आजीविका के लिये इस तरह के खतरे का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह हमारी लड़ाई का अंत नहीं है बल्कि एक नये चरण की शुरुआत है”।
पर्यावरण व वन मंत्रालय ने कोयला अध्यादेश के अनुसूची II और III में शामिल 74 ब्लॉक्स में से सिर्फ तीन कोयला ब्लॉक महान, मरकी मंगली II और नमचिक-नमफुक को खनन न करने का सुझाव दिया था। ग्रीनपीस के पास मौजूद सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि महान क्षेत्र के अन्य जंगलों की पहचान भी बहुत उच्च गुणवत्ता वाले वन के रूप में की गई है।
प्रिया का कहना है, “भले ही हम हजारों भारतीय नागरिकों के साथ इस जीत का उत्सव मना रहे हैं, लेकिन हम इस बात को समझते हैं कि भारत के जंगलों में प्रस्तावित सैकड़ों कोयला खदान में से महान सिर्फ अकेला है, जिसे बचाया जा सका है। जंगलों के निकट खनन पर रोक लगाने वाले पर्यावरण व वन मंत्रालय के मौजूदा मापदंड अपर्याप्त हैं, जिससे केवल खनन कंपनियां लाभ कमा रही हैं लेकिन जंगल पर निर्भर समुदाय तथा वन्यजीव की जरुरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। सरकार को जंगलों को अक्षत घोषित करने की प्रक्रिया को परामर्श के लिये सार्वजनिक करना चाहिए और उसके बाद सभी ब्लॉकों में इसे समान रूप से लागू करनी चाहिए”।
महान की नीलामी नहीं होने की खबर दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के हफ्ते भर बाद आया है जिसमें सरकार द्वारा प्रिया पिल्लई को लंदन जाने से रोके जाने को कोर्ट ने गलत बताया था। प्रिया महान में चल रहे आंदोलन के बारे में ब्रिटिश सासंदों को जानकारी देने लंदन जा रही थी क्योंकि महान को शुरुआत में लंदन स्थित एस्सार को आवंटित किया गया था।


