मि. प्राइम मिनिस्टर ! जब कांग्रेस ने चवन्नी बंद की थी तब आपकी औकात चवन्नी भर की भी थी क्या ?
बद्दुआयें खून के आँसू रुलायेंगी। देखते रहो।

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

नोटबंदी,

औरतों से इतना गुस्सा क्यों हो साहेब ?

पहले उनकी बचतें निकलवायीं । अब जेबर पर नजर है ?

क्रूर और निर्लज्ज हैं वे।

वे जियो सिम के लिए लगी लाइनों या किसी ऑडिशन के लिए लगी लाइन या फिर बेरोजगारी भत्ते के लिए लगी लाइनों का हवाला देकर करेंसी के लिए लगी लोगों की कतारों में बिलबिलाते लोगों का मज़ाक बना रहे हैं।

एक ही घोषणा में चलन की 84 फीसद मुद्रा 1000 एवं 500 के नोट का रद्दीकरण सीधे सीधे एक अरब से ज्यादा भारतीयों के जीवन को एक साथ ठप करना है।
इससे हुए हाहाकार की तुलना जियो सिम या ऑडिशन से करना अपने आप में उनकी मूर्खता, क्रूरता और निर्लज्जता का परिचायक है।
शर्म करो मोदी भक्तो!

मि. प्राइम मिनिस्टर !

जब कांग्रेस ने चबन्नी बंद की थी तब आपकी औकात चबन्नी भर की भी थी क्या ?

क्या देश के लोगों में ये हाहाकार मचा था ?

जब कांग्रेस ने सिर्फ हजार के नोटों की एक खास सीरीज को ख़ारिज करने की सोची थी तब उस सीमित नोटबंदी को आपकी पार्टी के जेटली और लेखी जैसे लोगों ने यह कहकर विरोध नहीं किया था कि इससे गरीब और छोटे व्यापारी तबाह हो जायेंगे ? आप तथ्यों से परे बोलते हो।

धन्य हैं ये !
ब्लैक मनी हटाने चले थे। मनी पर ही ब्लैक करा डाली। जगह जगह 5 के 4 और 1 के 8 हो रहे हैं।
खुद हर बैंक में एक आईडी पर 4000/- रु के हिसाब से पुरानी करेंसी के बदले नई दी जा रही है। इस काम के लिए शातिर लोगों ने पूरा जाल बिछाया हुआ है।

इस बात की खबरें आ रही हैं कि इस काम में बैंक कर्मचारियों की मिली भगत है। एक्सचेंज के नियमों में वे ढील के एवज में कमाई कर रहे हैं।

बड़े पैमाने पर डॉलर और गोल्ड की खबरें आ ही रही हैं।

और आप इसे 'ईमानदारी का उत्सव' कहते हो ?

एसोचैम के मुताबिक़ काम के घंटे बर्बाद होने और कारोबार बंद होने से 1 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा का नुक़सान हुआ है। ये देश नुकसान है।

अभी 50 में से 46 दिन बाकी हैं। प्रधानमन्त्री की अदूरदर्शिता से और क्या क्या होना है, देखते रहिये।
घटिया है प्रधानमंत्री की भाषा।
अभी तक हमने उनके मुहँ से 'गोली मार देना' 'थप्पड़ मार देना' 'लात मार देना' 'फांसी चढ़ा देना' शब्द सुने थे।

अब उन्होंने कहा है कि 'जिन्दा जला देना।

आखिर ये अंदर की हिंसा और जुगुप्सा ही तो है जो कंठ से बाहर आती है।

बाकी फांसी लगाने कोई तो आया नहीं 100 दिन में काला धन विदेश से न ला पाने के लिए। खुद ही कुछ शर्म कर ली होती।

ये रोना-धोना बंद करो। बहुत हुई नौटंकी। तुम प्रजापीड़क हो। कोई नहीं मारेगा तुम्हें। तुम्हारी सनक और अदूरदर्शिता का नतीजा है सब। करोड़ों लोगों की बद्दुआएं लगी हैं।
ऐसे लोग शहादत का सौभाग्य नहीं पाते। ये बद्दुआयें खून के आँसू रुलायेंगी। देखते रहो।
परवाह न कीजिये !

वे फेक एनकाउंटर या सशत्रबलों की ज्यादती के विरोध पर 'राष्ट्रविरोधी' कहेंगे। अल्पसंख्यक संरक्षण की बात पर 'तुष्टिकरण' का आरोप लगाएंगे। विमुद्रीकरण के बेबकूफना फैसले पर आपत्ति करने पर 'कालाधन समर्थक' कहेंगे। जनता को सब्सिडी का समर्थन करने पर 'मुफ्तखोरी को बढ़ावा' बताएँगे। कारपोरेट पूंजी को टैक्स की छूट , ब्याज माफ़ी या सहूलियतों की शक्ल में लाखों करोड़ लुटाने का विरोध करने पर वे आपको 'विकास विरोधी' कहेंगे।

अनुसूचित और पिछड़ों को आरक्षण की बात पर वे आपको 'प्रतिभा विरोधी' कहेंगे।

वे कहेंगे तो क्या आप चुप रहेंगे ?
आप चुप रहेंगे तो क्या वे ये सब गलत काम न करेंगे ? करेंगे तो आप कब तक चुप रहेंगे ?
चोर की दाड़ी में तिनका !

नोटबंदी को लेकर बीजेपी के नेता और मंत्री सिर्फ मायावती, मुलायम सिंह, केजरीबाल और राहुल को उनके एतराज के लिए कोस रहे हैं, जबकि इस मामले में सबसे तीखा प्रहार ममता बनर्जी और राज ठाकरे कर रहे हैं।

क्या काला धन सिर्फ उन इलाकों में है जहाँ माया मुलायम केजरी का असर है ? क्या जनता सिर्फ उन्ही इलाकों में त्राहि त्राहि कर रही है ?

क्या ये फैसला सिर्फ कुछ विधानसभा चुनावों के लिए है ?

मि. प्राइम मिनिस्टर !

आप देश के नाम सम्बोधन में झूठ बोले थे कि एटीएम 11 नवम्बर से काम करेंगे। आपके एफएम ने अब करीब एक महीने का वक्त बताया है उनके ठीक से काम करने का।

अभी तक आपकी सनक से सिर्फ आम आदमी को परेशानी सामने आई है और किसी कालेधन वाले को रोते पीटते बिलखते हमने नहीं देखा।

काले धन का जो 6% करेंसी की शक्ल में है (आई टी विभाग के अनुसार) उसका बड़ा हिस्सा तो वे 30 दिसंबर तक सफ़ेद कर ही लेंगे। ऐसे में आप पर कैसे यक़ीन करें कि 30 दिसंबर के बाद आप जो करने की धमकी जापान से दे रहो हो उसमें 'ईमानदार लोगों को कोई दिक्कत नहीं आएगी ' ?

मैं आप पर विश्वास खो चुका हूँ।

लानत है आप पर। आप हमसब को 'काला धन वाला' कह रहे हैं जो आपकी सनक, बेबकूफी, गैरजिम्मेदारी, लापरवाही, तंगनज़र, संगदिली और मक्कारी की वजह से परेशान आम इंसान हैं।

हमें आपकी इस हरक़त से सख्त एतराज है।

शर्म करो मोदी जी !

डूब मरो मोदी-भक्तो !

#Demonetisation #नोटबंदी

#CashlessEconomy

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