मिनी भाजपा बनकर तो भाजपा को नहीं हराया जा सकता

What is BJP's original character

पीयूष रंजन यादव

भाजपा का विरोध भाजपा जैसा बनकर या दिख कर नहीं किया जा सकता। आम कहावत है कि 'नकल असल के बराबर नहीं हो सकती' तो कोई भी भाजपा के बराबर नहीं हो सकता और यदि होने की कोशिश भी करेगा तो सत्ता के लिये धार्मिक ध्रुवीकरण के पक्ष में जाना होगा, जो कि भाजपा का मूल चरित्र है और यदि ये ही सब करना है तो फिर जनता नकल की बजायें असल को पकड़ेगी।

How is the BJP opposed?

तब भाजपा का विरोध कैसे हो?

और हो भी तो क्यों हो?

विभेदकारी धर्म जो सदियों से समाज में व्यक्तियों को जन्म लेते ही दो वर्गों में बांट देता है एक शासक और एक शोषित। जो कुछ को समस्त साधन उपलब्ध कराता है और दूसरे को पशुवत जीवन जीने को विवश कर देता है। भाजपा इन दोनों वर्गों में शासक वर्ग की विचार धारा को समर्पित उनका प्रतिनिधित्व करने बाली विचार धारा है और शोषित तबके को आवाज दे सकने की सर्वस्वीकार्य कोई ताकत नहीं है, और जो है वह स्वयं के स्वार्थ की वजह से जातियों के मठों में कैद है। ऐसे में सदियों से चली आ रही गैर बराबरी की लड़ाई को लड़ कर ही, भाजपा से मुलाबला किया जा सकता है।

बहादुरी से आगे आकर ताल ठोंक कर भारत के वंचित, शोषित, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक तबके के पक्ष में खड़ा होना होगा। उन्हें सदियों से जिन मानसिक गुलामी में जकड़कर रखा गया है उससे मुक्त करना होगा, उन्हें जगाकर अपने हके के लिये उन्हें लड़ना सीखाना होगा।

इसी तरह से और इन्हीं वजहों से भाजपा को हराया जा सकता है न कि मिनी भाजपा बनकर।

(लेखक उप्र पीसीसी के पूर्व सदस्य व भीमनगर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हैं। )

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