मीडिया का घृणित और साम्प्रदायिक चेहरा
मीडिया का घृणित और साम्प्रदायिक चेहरा
मीडिया का घृणित और साम्प्रदायिक चेहरा
महेंद्र मिश्र
आज तक चैनल ने असदुद्दीन ओबैसी और सुब्रमण्यम स्वामी के बीच बहस आयोजित कर उसका प्रसारण किया है। बहस में राम मंदिर समेत दूसरे साम्प्रदायिक मुद्दे प्रमुखता से छाए थे।
मीडिया का इतना घृणित और साम्प्रदायिक चेहरा इतने घिनौने रूप में सामने आएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। इस आयोजन में जोड़ने की जगह लोगों को बांटने की साजिश छुपी हुई है।
यह कुछ और नहीं बल्कि बीजेपी और संघ के साम्प्रदायिक विभाजन के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है।
दरअसल बीजेपी-संघ के लाख हमलों और साजिशों के बाद भी अल्पसंख्यक तबके की तरफ से कोई खास प्रतिक्रिया नहीं हो रही है। इसको लेकर बीजेपी-संघ में खासी बेचैनी है। ऐसे में उसमें गुस्सा भरने और फिर उस आग को हवा देने के लिए एक सिंबल की जरूरत है। इस लिहाज से उसे ओबैसी जैसा एक चेहरा मिल गया है। और उसका वह जगह-जगह इस्तेमाल कर रही है।
पूरे अल्पसंख्यक तबके पर हमले की बजाय एक व्यक्ति को निशाना बनाना ज्यादा आसान है।
बीजेपी को इस लिहाज से भी ओबैसी मुफीद दिखते हैं।
बीजेपी-संघ को एक जिन्ना की तलाश है।
अंग्रेजों के लिए जिन्ना की जो भूमिका थी बीजेपी वही संभावनाएं ओबैसी में देखती है। आंध्रा से लेकर महाराष्ट्र और बिहार से लेकर यूपी में ओबैसी की गतिविधियां इसी तरफ इशारा करती हैं।
बीजेपी को एक वोकल मुस्लिम नेता चाहिए जिसको सिम्बल बना देने से फिर अल्पसंख्यकों पर हमला आसान हो जाता है। यूपी में उसे आजम खान मिल जाते हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अभी कोई ऐसी शख़्सियत नहीं है। ओबैसी को उसी दिशा में विकसित करने की कोशिश है।
कश्मीर में घाटी के बाशिंदों की भलाई के लिए तो केंद्र ने कुछ नहीं किया।
हां एक काम में वो अलबत्ता सफल होती दिख रही है। वह है कश्मीर के पूरे मामले को साम्प्रदायिक रंग देकर उसे देश के बाकी अल्पसंख्यक तबके से जोड़ देना। जिससे उसका फायदा उठाया जा सके। ओबैसी की कश्मीर यात्रा को इसी कड़ी के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
इस पूरी कड़ी में ओबैसी का भले ही कुछ व्यक्तिगत लाभ हो जाए, लेकिन अल्पसंख्यक तबके का बड़ा नुकसान है। और एक बार बंटवारे का दंश झेल चुके मुल्क में इस तरह की रत्ती भर भी आशंका बहुसंख्यक हिन्दू तबके को नाराज करने के लिए काफी है। बीजेपी उसी मौके की फ़िराक में है।


