मीडिया भीम आर्मी के चंद्रशेखर उर्फ रावण को सहारनपुर हिंसा का मास्टर माइंड बता रहा, मीडिया है या खुफिया विभाग

मसीहुद्दीन संजरी

एक खबर देख कर चौंक गया। शीर्षक था "सहारनपुर हिंसा के मास्टर माइंड भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण को पुलिस ने पकड़ा"।

हैरानी हुई कि सहारनपुर में सड़क दुधली की हिंसा, एसएसपी के घर पर तांडव, शब्बीरपुर दलित बस्ती में आगजनी, लूटपाट, हिंसा, कहीं भी भीम सेना का नाम नहीं था।

पहली बार भीम सेना का नाम शब्बीरपुर पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए विरोध प्रदर्शन के हवाले से आया जो 9 मई को होने वाला था लेकिन पुलिस ने उसे रोका, बल प्रयोग किया, लाठियां भांजी और नतीजे में उग्र हो गए प्रदर्शनकारियों ने आगजनी की और पुलिस से टकराए।

भीम सेना के संस्थापक के तौर पर चंद्रशेखर का नाम आया जो अब चंद्रशेखर के साथ 'रावण' के नाम से भी मशहूर है। अब मीडिया ललकार रहा है कि वही सहारनपुर हिंसा का मास्टरमाइंड है।

प्रायः अब तक दंगों या जातीय हिंसा में मास्टमाइंड का ढिंढोरा नहीं पीटा जाता था। यह शब्दावली केवल आतंकवाद से सम्बंधित पुलिसिया कहानियों के लिए खास थी। सहारनपुर में 20 अप्रैल को सड़क दुधली में भी हिंसा हुई थी और उसी दिन एसएसपी आवास पर हमला हुआ था। हमला करवाने वाला भीड़ की अगुवाई कर रहा था। लेकिन मीडिया ने कभी उसमें मास्टर माइंड नहीं देखा।

5 मई को शब्बीरपुर में दलित बस्ती पर संगठित हमला हुआ। नामज़द रिपोर्ट दर्ज कराई गई। हमले के लिए उकसाने और उसमें सक्रिय भूमिका निभाने वाले का नाम भी कुछ रिपोर्टों में आया है लेकिन वह मास्टर माइंड नहीं बन पाया।

भीम आर्मी का पहला कदम लोकतांत्रिक था। उसने शब्बीरपुर के पीड़ितों के लिए मुआवज़ा और गुनहगारों के खिलाफ कारवाई की मांग करने के लिए लोगों का आवह्न किया था। पुलिस ने पहले से तैयारी कर उनको बड़ी संख्या में एकत्र होने से रोकने या आश्वासन देकर विरोध प्रदर्शन खत्म करवाने के बजाए लाठी का सहारा लिया। भीड़ कई हिस्सों में बिखर गई और फिर पुलिस से झड़पें हुईं और सार्वजनिका वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। यह सब अलग अलग स्थानों पर हुआ फिर भी पुलिस इसे संगठित हिंसा मान रही है और उसने मास्टरमाइंड भी ढ़ूंढ लिया।

मीडिया खबरें इस तरह प्रसारित कर रहा है जैसे अब तक सहानपुर में जितनी भी हिंसा हुई है सबका मास्टर माइंड चंद्रशेखर @ रावण है।

सहारनपुर में हिंसा, अराजकता, लूटमार, हत्या के लिए भीम सेना को एक सिम्बल बना दिया और उसके संस्थापक को मास्टर माइंड।

भीम सेना के खतरे तो मीडिया बता ही रहा है लेकिन जितने अल्प समय में भीम सेना का नाम आया और उसके इर्द–गिर्द हिंसा की राजनीति की पूरी इबारत लिखी जाने लगी वह संदेह भी उत्पन्न करती है। जिस व्यक्ति को मास्टरमाइंड कह कर पकड़ा गया है पता नहीं वह वास्तव में मास्टरमाइंड होने के योग्य भी है या विगत के कई मामलों की तरह अपरधियों की खाली जगह पेड मुखबिरों से भरने का कोई नया कारनामा।