नई दिल्ली, 18 जुलाई। अरविन्द केजरीवाल के घर के आगे आँगनवाड़ी कर्मचारी और सहायिका भूख हड़ताल पर बैठी हैं। जहाँ एक तरफ़ पूरा देश ईद की खुशियाँ बाँट रहा है वहीं आँगनवाड़ी की ये महिलाएं दिल्ली सरकार से अपनी माँगों को लेकर लड़ रही हैं।
ज्ञात हो कि पिछले 11 दिनों से ये महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर केजरीवाल के घर के आगे बैठी हुइ हैं। परन्तु अभी तक सरकार की ओर से महीला कर्मचारियों को कोई भी आश्वासन नहीं मिला है।
क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठी आँगनवाड़ी कर्मवारी राधा ने बताया कि सरकार ने अभी तक कर्मचारियों की बात सुनने को तैयार नहीं है और सुपरवाइजर काम से निकालने की धमकी दे रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले धरना देने में माहिर मुख्यमंत्री केजरीवाल के निवास से कोई भी भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की सुध भी नहीं लेने आया है।
राधा ने आगे बताया कि भूख हड़ताल के साथ ही अब कर्मचारी सभी आँगनवाड़ी पर ताला लगा देगी और आँगनवाड़ी के लिए आ रहा सारा खाना गाडियों से उतरने नहीं देंगी।
हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में आए बिगुल मज़दूर दस्ता के नितिन ने बताया कि हड़तालकर्मियों की मांग है कि उन्हें स्थायी किया जाए, उनकी आय की श्रेणी सुनिश्चित की जाए और प्रोहत्साहन राशि की बजाए आय दी जाए, और इस आय का भुगतान हर महीने सुनिश्चित समय तक किया जाए साथ ही सभी कर्मचारियों को पेहचान पत्र, ई.एस.आई., पी.एफ कार्ड दिए जाए, ग्रीष्म कालीन और शीत कालीन छुट्टियां दी जाए और रिटायर होने पर पेंशन दी जाए। आंगनवाड़ी कर्मचारी दिल्ली की गरीब आबादी के बच्चों को चिकत्सा, शिक्षा पहुँचाने के साथ साथ गर्भवती औरतों की देख रेख और उन्हें प्रसव के बारे में जानकारी देने और शिक्षित करने का काम करती हैं। हर एक आंगनवाड़ी कर्मचारी पर अपने इलाके के 1000 लोगों की देख रेख की जि़म्मेदारी होती है। इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण जि़्म्मेदाारी का निर्वाह करने के बावजूद इन कर्मचारियों कि खुद की हालत बेहद खस्ता है, इन्हे प्रति माह 4000 रुपए ओनोरेरियम के रूप में मिलता है जिसका भुगतान भी समय पर नहीं किया जाता। आंगनवाड़ी के कर्मचारियों के प्रति सरकार हमेशा से उदासीन रही है मगर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के साथ कर्मचारियों में यह आशा पैदा हुई थी कि शायद केजरीवाल सरकार जरूर आँगनवाड़ी कर्मी की मांगों को पूरा करेगी। परन्तु यह सरकार भी 526 करोड़ रूपए अपने प्रचार के लिए खर्च कर सकती है, कारखानेदारों को लाइसेन्स राज से मुक्ति दिलाने में एड़ी चोटी का जोर लगा सकती है परन्तु दिल्ली के बचपन को संवारने वाली आँगनवाड़ी कामगारों की 11 दिन की हड़ताल के बाद भी उनही कोई सुध नहीं ले रही है। साफ़ है कि केजरीवाल सरकार में और कांग्रेस, भाजपा में भी कोई अन्तर नहीं है।
आँगनवाड़ी कर्मियों ने धरना स्थल पर ही खुद को संगठित करते हुए कार्यकारिणी समिति का भी चुनाव किया।
विज्ञप्ति