दिल्ली/लखनऊ 08 सितम्बर। मुजफ्फरनगर में हुये दंगों पर अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सूबे की समाजवादी पार्टी सरकार विरोधी दलों के निशाने पर आ गई है। रिहाई मंच, राष्ट्रीय लोकदल और आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) ने समाजवादी पार्टी को इसके लिए कटघरे में खड़ा किया है।

केन्द्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लेकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने अखिलेश सरकार को बर्खास्त कर सूबे में राष्ट्रपति सासन लगाये जानेकी माँग की है।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा है कि पिछली 27 तारीख से ही मुजफ्फरनगर में जिस तरह से साप्रदायिक ताकतें सपा के प्रशासनिक संरक्षण में सांप्रदायिक व सामंती तत्वों को बढ़ावा दिया उसके नतीजे में 10 से अधिक बेगुनाहों को जान से हाथ धोना पड़ा। यह पूरा दंगा पूर्व नियोजित षडयंत्र का परिणाम है और यह षडयंत्र लुक छिप के नहीं बल्कि पंचायतें लगाकर खुलेआम एक समुदाय विशेष के खिलाफ आगे गोलबंदी की गयी और उसके बाद संगठित हमला। ऐसे में मुजफ्फरनगर जिले के प्रशासनिक अमले से लेकर यूपी के एडीजी लॉ एण्ड आर्डर अरुण कुमार तक की इन दंगों में खुली भूमिका के चलते तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करते हुये दंगे की सीबीआई जांच करानी चाहिए। मोहम्मद शुएब ने कहा कि जिस तरीके से सैकड़ों दंगे कराने वाली सपा सरकार इंसान की कीमत मुआवजों से लगा रही है वो उससे बाज आए क्योंकि जिसका बेटा, जिसका पती मरा होगा, जिसके बच्चे अनाथ हुये हैं उनके आसुओं को पैसों से नहीं तोला जा सकता।

आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आई. जी. एस. आर. दारापुरी ने आरोप लगाया है कि मुजफ्फरनगर में कल हुआ दंगा सपा सरकार की सोची समझी रणनीति का परिणाम है। उन्होंने इस घटना पर, जिसमें दो पत्रकारों की भी मृत्यु हुयी है, गहरा दुःख प्रकट करते हुये माँग की है कि इस दंगें की न्यायिक जाँच करायी जानी चाहिए और जो अधिकारी इसके लिये दोषी है उन्हें दण्डित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह जानते हुये भी कि मुजफ्फरनगर में पहले से ही साम्प्रदायिक तनाव चल रहा था और इसके पूर्व भी लोगों की हत्याएं तक हो चुकी थी, वहाँ कड़ाई से माहौल को सामान्य बनाने की जगह सपा सरकार के प्रशासन ने महापंचायत करने की अनुमति प्रदान की और सोची समझी रणनीति के तहत इस दंगें को कराया। उन्होंने कहा कि अपने निहित राजनीतिक स्वार्थ के लिये सपा सुप्रीमो और उनके निर्देशन में चल रही अखिलेश सरकार लगातार प्रदेश में विभाजन की राजनीति करने और साम्प्रदायिक आधार पर धुव्रीकरण कराने की कोशिशों में लगी हुयी है। इसके पहले भी प्रदेश में दो दर्जन से ज्यादा दंगें हो चुके हैं और मुजफ्फरनगर का दंगा भी इसी रणनीति का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि आइपीएफ द्वारा आगामी 17 सितम्बर से सपा सरकार की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिये विधानसभा के सम्मुख आयोजित 50 धण्टें के उपवास में मुजफ्फरनगर में हुये दंगें की न्यायिक जाँच और इस दंगें के लिये जबाबदेह अधिकारियों को दण्डि़त करने के सवाल को उठाया जायेगा।