मालेगांव विस्फोट में बेगुनाहों को निष्पक्ष विवेचना से वंचित रखने वाले एडीजी अरुण कुमार से यूपी में न्याय की उम्मीद नहीं - रिहाई मंच
आज क्रमिक उपवास पर रिहाई मंच के नेता तारिक शफीक बैठे
खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिये अट्ठाइसवें दिन भी विधान सभा लखनऊ पर जारी रहा रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना

लखनऊ, 18जून। “वर्तमान एडीजी कानून व्यवस्था उन अफसरों में से हैं जिन पर माले गांव ब्लास्ट जैसे आतंकवाद के मामले में झूठे फँसाये गये निर्दोष मुस्लिम युवक अबरार और उसके साथियों के मामले में निष्पक्ष विवेचना न करने का आरोप है। अबरार द्वारा अरुण कुमार पर यह आरोप लगाया गया है कि सीबीआई के वरिष्ठ पदाधिकारी/ विवेचक रहते हुये उन्होंने अबरार सहित अन्य युवकों के बयान सही नहीं लिखे व विवेचना निष्पक्षता पूर्वक गहराई से नहीं की और यदि एनआईएद्वारा अपनी जाँच में वास्तविक तथ्य खोज कर न लाये गये होते तो वो बरी न हो पाते। इसलिये उत्तर प्रदेश में ऐसे व्यक्ति का एडीजी कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे होने की वजह से यह सम्भावना नहीं है कि निर्दोष लोगों को निष्पक्ष विवेचना और न्याय मिल पायेगा।“ यह विचार रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब और अवामी काउंसिल के महासचिव असद हयात ने रखे। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष विवेचना न्याय का आधार होती है।
नेता द्वय आज खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी, आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी कर दोषी पुलिस व आईबी के अधिकारियों को गिरफ्तार करने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को तत्काल रिहा करने की माँग को लेकर रिहाई मंच के धरने पर आयोजित सभा में बोल रहे थे।

अनिश्चितकालीन धरना आज अट्ठाइसवें दिन भी जारी रहा। क्रमिक उपवास पर आज संजरपुर, आजमगढ़ से आये रिहाई मंच के नेता तारिक शफीक बैठे।

धरने को सम्बोधित करते हुये रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब और अवामी काउंसिल के महासचिव असद हयात ने कहा कि आखिर ऐसे महत्वपूर्ण पद पर इस आचरण के व्यक्ति को बिठाने के पीछे सरकार की मंशा क्या है? ज्ञात रहे कि पिछले डीजीपी एसी शर्मा पर 1992 में कानपुर दंगों में संलिप्तता का आरोप था जिस पर माथुर कमीशन तक बना तो वहीं कानून व्यवस्था को बरकारार रखने वाले अरुण कुमार पर मालेगांव में बेगुनाह मुस्लिम युवकों को झूठा फँसाये रखने और उन्हें न्याय से वंचित रखने का आरोप है। ऐसे में क्या ऐसा व्यक्ति खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी जैसे लोगों को न्याय दिला पायेगा, जिनकी गिरफ्तारी और जिनसे असलहे/ विस्फोटक पदार्थों की बरामदगी की कहानी पुलिस और एसटीएफ द्वारा फर्जी और गढ़ी गयी हो। ऐसे में रिहाई मंच माँग करता है कि अल्पसंख्यकों के प्रति बीमार मानसिकता रखने वाले अरुण कुमार को तत्काल एडीजी कानून व्यवस्था के पद से हटाया जाये।

धरने को सम्बोधित करते हुये पूर्व सांसद इलियास आजमी ने कहा कि इशरत जहाँ फर्जी मुठभेड़ के बाद उसे लश्कर का आतंकी कहा गया था। अब जब उस मुठभेड़ पर ही सवाल उठ गया है और पुलिस अधिकारियों के साथ इशरत और उसके साथ मारे गये अन्य युवकों की सुनियोजित षडयंत्र के तहत हत्या करने के मामले में आईबी अधिकारी राजेन्द्र कुमार का नाम सामने आ गया है तब यह सवाल भी उठना चाहिये कि राजेन्द्र कुमार समेत गुजरात के पीसी पांडे, बजारा, सिंघल के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के साथ क्या रिश्ते हैं? क्योंकि इस फर्जी मुठभेड़ के बाद इन दोषी पुलिस अधिकारियों ने एके 47 की बरामदगी का दावा किया था, और जब साफ हो गया है कि आईबी के राजेन्द्र कुमार ने एके 47 मुहैया कराई थी तो इस बात को साफ हो जाना चाहिये कि ये आईबी और पुलिस के अधिकारी कैसे इस देश में तथाकथित लश्कर ए तैयबा के नाम पर गतिविधियाँ चलाते हैं।

धरने के समर्थन में आजमगढ़ से आये राष्ट्रीय जनसंघर्ष पार्टी के अध्यक्ष अफजल खान और महासचिव परमात्मा शरण पाण्डेय ने कहा कि आज जब साफ हो गया है कि तारिक और खालिद की फर्जी तरीके से गिरफ्तारी हुयी थी ऐसे में तब यह और जरुरी हो जाता है कि मरहूम मौलाना खालिद मुजाहिद और तारिक के साथ टॉर्चर व अमानवीय व्यवहार करने वाले एसटीएफ के अमिताभ यश समेत उन तमाम पुलिस वालों पर भी सख्त कार्रवाई हो जिन्होंने हमारे मासूम युवकों को सूअर का माँस, शराब और पानी माँगने पर पेशाब पीने को मजबूर किया। अगर सरकार ने दोषी पुलिस अधिकारियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया होता तो हमारा बेगुनाह भाई मौलाना खालिद जिन्दा ही न होते बल्कि इस बेगुनाहों की रिहाई की इस तहरीक में आवाज बुलन्द करते।

दिल्ली से आईं पत्रकार भाषा सिंह ने धरने को समर्थन देते हुये कहा कि सपा सरकार धोखे की दुनिया परोस रही है। जब मैं आरडी निमेष से मिलीं थी तो वो रिपोर्ट सदन में न पेश होने पर काफी हताश थे। आज खालिद के न्याय की यह लड़ाई सिर्फ खालिद की नहीं बल्कि सरकारों की आतंकवाद के नाम पर मुस्लिमों के खिलाफ खेले जा रहे नीतिगत सवालों के खिलाफ एक ऐसी तहरीक है जिसे पूरे देश में चलाने की आज जरूरत है, क्योंकि इंसाफ लोकतंत्र का तकाजा है और इसलिये यह लड़ाई राजनीतिक लड़ाई है।

सीतापुर से आये इशहाक ने कहा धरने को सम्बोधित करते हुये कि हम देखना चाहते हैं कि यह सरकार हमारे सवालों को जवाब देने से कब तक भागेगी। खालिद के न्याय की लड़ाई उन सभी बेगुनाहों के न्याय की लड़ाई है जो जेलों में बन्द हैं। हमारे भाई शकील और बहनोई को भी आतंकवाद के मामले में झूठा फँसाया गया था और हमने सपा सरकार से माँग की थी कि वो इसकी जाँच कराए पर जिस तरह से आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट आने के बाद खालिद का कत्ल कर दिया गया, उसने एक बार हमें जरुर झटका दिया, पर रिहाई मंच के इस धरने जिसका दो दिनों बाद एक महीना होने जा रहा है, ने हमको बहुत बल दिया है कि न्याय की लड़ाई में हमारे सामने लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है इसलिये हमने भी ठान लिया है इस लड़ाई को इसकी मंजिल तक पहुँचाकर ही हम दम लेंगे।

दिबियापुर जिला औरया में स्थित कब्रिस्तान पर भूमाफियाओं द्वारा किये जा रहे कब्जे को हटवाने के लिये विधानसभा पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हाजी अब्दुल मसीह कादरी ने कहा कि हम कई दशक से अपने कब्रिस्तान को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं पर किसी ने हमारी बात को नहीं सुना, आज जब हम लखनऊ विधानसभा पर बैठे हैं और बहुत से और सवालों को देख रहे है कि मुस्लिमों का वोट लेकर सरकार जिस तरीके से वादा खिलाफी कर रही है वो बताता है कि हमारी इस सरकार में कोई सुनवाई नहीं है। पर जब तक हमारे कब्रिस्तान व मरघट पर से भूमाफियाओं का कब्जा नहीं हटवाती सरकार तब तक हम धरना देते रहेंगे।

धरने का संचालन आजमगढ़ रिहाई मंच के नेता तारिक शफीक ने किया। धरने में वाराणसी से आये वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, मुनव्वर सेराज, भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोइद अहमद, योगेन्द्र सिंह यादव, सोशलिस्ट फ्रंट के मो0 आफाक, आजमगढ़ से राष्ट्रीय जनसंघर्ष पार्टी के अध्यक्ष अफजल खान और महासचिव परमात्मा शरण पाण्डेय, मो0 असद गुड्डू, नागरिक अधिकार संगठन से रफीक अली, सारिक वहीद, अखिलेश सिंह, मो0 दानिश शम्सी, जमील अहमद, प्रतापगढ़ पीस पार्टी के शम्स तबरेज खान, अभिषेक सिंह, सदरुद्दीन बाबा, मोशीर अहमद, शुऐब, मौलाना कमर सीतापुरी, जुबैर जौनपुरी, मौलाना शमशाद, अशोक कुमार, और राजीव यादव आदि शामिल रहे।