मैं नहीं शामिल मुख्यधारा में/ जिसे होना हो तो हो
मैं नहीं शामिल मुख्यधारा में/ जिसे होना हो तो हो
क्या है तुम्हारी मुख्यधारा
——•——
मैं नहीं शामिल मुख्यधारा में
जिसे होना हो तो हो
क्या है तुम्हारी मुख्यधारा
धार्मिक पाखण्ड पर्वत से निकली
सांप्रदायिक अलगाव के गंदे नालों से भरी
नफरत की उफनती नदी ?
वर्ण व्यवस्था के घाटों से होकर बहती
हिंसक उन्माद की नहरें मिलती हैं
लाशें बहती इस धारा में
जली बस्तियों की राख गिरती
टूटे सपने बहते हैं
कल कल की निश्छल आवाज नहीं
अनूगूँज आती क्रंदन विलाप दहाड़ों की
प्रेम सद्भाव बहा ले जाती
संविधान के तटबंधों को धता बताती
न्यायिक हदों को तोड़ती
अधिनायकवाद की भूमि पर बह रही तुम्हारी मुख्यधारा
तुम्हे मुबारक तुम्हारी मुख्यधारा
जसबीर चावला
Next Story


