मोदी जी ! गांधी जयंती पर अपने मन मस्तिष्क में भरे हिंसा द्वेष और षड्यंत्रों की सड़ांध की सफाई भी कर लेते

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

गांधी जी ने कहा था, 'राज्य सत्ता एक हिंसक संगठन होता है।' गांधी जयंती के दिन किसानों के राजघाट मार्च पर बीजेपी सरकार ने निर्मम बल प्रयोग करके सत्ता के हद दर्जे क्रूर चेहरे को और स्पष्ट किया है

अंतर्बाह्य शुचिता दोनों की बात की थी गांधी जी ने, लेकिन आप उन्हें बस 'सफाई नायक' बना रहे हो मोदी जी ! आज अपने मन मस्तिष्क में भरे हिंसा द्वेष और षड्यंत्रों की सड़ांध की सफाई के लिए आत्मावलोकन का दिन भी मना लेते तो अच्छा था !

गांधी जी की विराटता को शब्दों की परिधि में समेटना संभव नहीं है। महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने सही कहा था कि आने वाली पीढ़ियां सहजता से विश्वास नहीं कर पाएंगी कि हाड़ मांस से बना ऐसा कोई मनुष्य कभी इस पृथ्वी पर था।

भारत के शुद्ध अंतःकरण की औपचारिक अभिव्यक्ति थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। वे भारत के अंतर्मन का वैश्विक परिचय थे जिसमें जगत की जय का भाव था। अनेक बिंदुओं पर उनसे असहमत हुआ जा सकता है लेकिन उनके मन की शुद्धता और मनुष्यमात्र के प्रति करुणा एवं बंधुत्व पर संदेह का कोई लेशमात्र आधार नहीं पाया जा सकता। लोकमानस से गांधी जी की अप्रतिष्ठा में अनवरत जुटे रहे फासिस्ट निःसन्देह आज भारत की सत्ता में हैं और हिंसा द्वेष षड्यंत्रों की राजनीति का सत्ता को औजार बना लिया है, ऐसे में गांधी पूरे उपमहाद्वीप की शांति और एकजुटता के लिए पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं

साधुवाद सीपीआई !

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रांतीय सहसचिव कामरेड अरविन्द राजस्वरूप की पोस्ट से पता चला कि पार्टी ने अपनी शाखाओं और सदस्यों को गांधी जयंती मनाने को कहा है। फासिज्म के विचार का प्रतिवाद करने में गांधी जी के विचार और व्यवहार का बड़ा अंश देश के लिए बहुत सार्थक और उपयोगी है। कम्युनिस्ट पार्टी का यह नया और उचित स्टैंड है जिसका मैं जोरदारी से स्वागत करता हूँ।

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(मधुवन दत्त चतुर्वेदी की एफबी टिप्पणियों का समुच्चय)